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रोग लगने से सूख रही किसान के खेतों में खड़ी गेहूं-चने की फसल

किसानों की गेहूं और चने की फसल पर भी संकट के बादल मंडराने लगे है।

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अज्ञात रोग लगने से सूख रही किसान के खेतों में खड़ी गेहूं-चने की फसल

अज्ञात रोग लगने से सूख रही किसान के खेतों में खड़ी गेहूं-चने की फसल

सीहोर. अतिवृष्टि के चलते पहले ही किसान सोयाबीन की फसल में खासा नुकसान झेल चुका चुक है। अब पुन: किसानों की गेहूं और चने की फसल पर भी संकट के बादल मंडराने लगे है। कुछ किसानों के खेतों में लगी गेहूं-चने की फसल के पौधे पीले होकर ऊपर से सूखने लगे हैं। गेहूं-चने की यह स्थिति किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। किसानों का कहना है कि इस तरह का रोग पहले कभी गेहंू-चने की फसल में नहीं दिखाई दिया था।


तहसील क्षेत्र के अनेक किसानों के खेतों में फसल सूखने की शिकायत मिल रही है। वहीं ग्राम खेजड़ा में किसानों के खेत में लगी गेहूं-चने की फसल के पौधे पीले होकर ऊपर से सूखने लगे हैं। इछावर के ग्राम खेजड़ा में करीब 50 क्विंटल गेहूं-चने की फसल को डबल से बोना पड़ा। किसानों का कहना है। डबल बोनी में भी यह बीमारी धीरे धीरे बढ़ती जा रही। इस बीमारी का गेहूं में अधिक नुकसान है। जिसको लेकर किसान खासे चितिंत है।

किसान इस बीमारी को समझ नहीं पा रहे है आखिर यह रोग है क्या और इसका निदान क्या है, कृषि विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।

इस संबंध में किसान बनवारीलाल विश्वकर्मा, सरवन वर्मा, राधेश्याम वर्मा, हरेंद्रसिंह ठाकुर, कृपालसिंह ठाकुर, बंशीलाल विश्वकर्मा, जगदीश विश्वकर्मा, भूरा विश्वकर्मा, डोलू विश्वकर्मा, तखतसिंह ठाकुर, संतोष वर्मा, नारायणसिंह, निखिल विश्वकर्मा, छगन वर्मा, लखन वर्मा, सुनील वर्मा आदि किसानों का कहना है कि कृषि विभाग इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहा है। किसानों का कहना है कि कृषि विभाग द्वारा सोयाबीन की फसल में भी समय पर सर्वे नहीं कराया गया।

जब हमारे द्वारा जन आंदोलन किया तो नींद खुली फिर भी सही से सर्वे नहीं करा पाया। जिसके कारण आज तक मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। वहीं इस बीमारी को लेकर भी किसान कृषि विभाग के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके हैं, लेकिन इस तरफ कृषि विभाग का कोई ध्यान नहीं है। ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी न तो आफिस में मिलते हैं और न ही मैदान में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में किसान अपनी समस्या किसे बताएं।

जड़माहू रोग गेहूं की फसल में तेजी से फेल रहा है इसी वजह से पौधे पीले पड़ रहे हैं। किसानों को चाहिए कि 100 एमएल प्रति एकड़ के हिसाब से इमेटाप्रिड नामक दवा का छिड़काव करें। काला कीड़ा यदि जड़ काट रहा तो 80 एमएल 80 ग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से कीमामाइसिन बेंजोएड का और यदि कटवा इल्लियां लगी हों तो क्लोरोपायरीफास का छिड़काव 500 एमएल प्रति एकड़ के मान से किसान भाई करें।
जेके कन्नौजिया, कृषि वैज्ञानिक, केवीके इछावर