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बड़ी बिजासन माता मंदिर का कलेक्टर या सेंधवा एसडीएम कर सकते है संचालन

वर्तमान ट्रस्ट के सदस्यों ने किया निर्णय का स्वागत, ट्रस्ट के पुराने सदस्यों को भी स्थान दिए जाने की मांग

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Collector or Sendhwa SDM can operate the Badi Bijasan Mata Temple

Collector or Sendhwa SDM can operate the Badi Bijasan Mata Temple

बड़वानी. सेंधवा से करीब 16 किमी दूर बिजासन घाट पर स्थित मां बड़ी बिजासन मंदिर के संचालन को लेकर प्रशासन और वर्तमान ट्रस्ट में खींचतान की संभावना है। शासन द्वारा मंदिर का संचालन कलेक्टर या एसडीएम को सौंपने की तैयारी की जा रही है। वहीं वर्तमान ट्रस्ट के पदाधिकारी इस निर्णय का स्वागत तो कर रहे है। साथ ही उनकी मांग है की जो भी नई व्यवस्था हो, उसमें ट्रस्ट के पुराने सदस्यों को भी स्थान दिया जाए।
बड़ी बिजासन माता मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है। ऐसे में शासन मंदिर के संचालन का काम अपने हाथों में लेना चाहता है। पिछले दिनों सेंधवा से 16 किमी दूर स्थित बड़ी बिजासन मंदिर का प्रबंध और व्यवस्था को लेकर पानसेमल एसडीएम की ओर से मंदिर को संचालित करने वाली ट्रस्ट को पत्र जारी कर ट्रस्ट के पंजीयन पर 5 जनवरी तक आपत्ती मांगी है। इस पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बड़वानी कलेक्टर से चर्चा की है। हालांकि विधायक ग्यारसीलाल रावत द्वारा बड़ी बिजासन क्षेत्र को सेंधवा का बताते हुए इस पर सेंधवा एसडीएम द्वारा प्रबंधन किए जाने की बात कही है द्य
तीन राज्यों के लाखों लोग आते दर्शन करने
मप्र और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित बड़ी बिजासन मंदिर जो गुजरात, महाराष्ट्र और मप्र के भक्तों का आस्था का केंद्र बनकर मंदिर अपनी भव्यता को लेकर लोकप्रिय है। वर्ष के दो नवरात्रों में लाखों की तादाद में श्रद्धालु मंदिर के दर्शन करने आते है। वर्ष भर प्रतिदिन और विशेषकर मंगलवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है।
कलेक्टर या सेंधवा एसडीएम संभाले प्रशासन का दायित्व
सेंधवा विधायक ग्यारसी लाल रावत ने कहा कि पिछले कई वर्षों से पार्टी विशेष के लोग बड़ी बिजासन माता मंदिर ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं। मंदिर परिसर राजनीतिक बैठकों का केंद्र बनता जा रहा है, जो गलत बात है। विधायक रावत ने कहा कि बड़ी बिजासन मंदिर क्षेत्र सेंधवा विकासखंड की ग्राम पंचायत बख्तरिया में आता है। इसका पुराना रिकॉर्ड शासन के पास उपलब्ध है। वहीं उनके विधायक रहते हुए बाउंड्रीवॉल के लिए 27 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। इससे ये प्रमाणित होता है कि बड़ी बिजासन माता मंदिर सेंधवा विकासखंड के तहत आता है ना की किसी और विकासखंड के तहत। रावत ने कहा की नई व्यवस्था से विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। वहीं पारदर्शिता बढ़ेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा संपूर्ण प्रदेश के बड़े धार्मिक परिसरों और मंदिरों को प्रशासन को सौंपने की योजना बेहद सकारात्मक है। ऐसे में सेंधवा विकासखंड के मां बड़ी बिजासन मंदिर और नागलवाड़ी स्थित शिखर धाम मंदिर को भी जिला कलेक्टर या संबंधित विकासखंड के एसडीएम संभाले ये बेहतर पहल होगी।
वर्तमान ट्रस्ट सदस्यों ने किया नई व्यवस्था का स्वागत
ट्रस्ट के वर्तमान सदस्य विकास आर्य ने बताया कि प्रशासन द्वारा जो निर्णय लिया जाएगा, उसका हम स्वागत करते है। हालांकि मंदिर संस्थान का पिछले कई वर्षों से संचालन हमारे ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। पारदर्शिता के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाता है। वहीं समिति के लोग 24 घंटे सेवा देते है। वर्ष में कई अवसरों पर मंदिर में धार्मिक आयोजन सहित भंडारे होते रहते है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते है। ऐसे में नई व्यवस्था के दौरान ट्रस्ट के पुराने और अनुभवी सदस्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
ट्रस्ट सदस्यों से मुलाकात करेंगे कलेक्टर
वर्तमान में मां बड़ी बिजासन धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष एस वीरस्वामी है। विकास आर्य ने बताया कि जल्द ही इस मामले को लेकर ट्रस्ट के सदस्य कलेक्टर से मुलाकात करेंगे। आर्य ने कहा कि कुछ राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा पार्टी विशेष के सदस्योंं के द्वारा ट्रस्ट का संचालन करने की बात कही जा रही है, ये गलत तथ्य है। वर्तमान ट्रस्ट द्वारा पूरी पारदर्शिता और अनेक ऐसे सदस्य ट्रस्ट सहित मंदिर समिति से जुड़े है, जो कई राजनीतिक पार्टियों में शामिल है। लेकिन वह सिर्फ माता के मंदिर में निस्वार्थ सेवा के लिए जुड़े है। वर्तमान में मां बड़ी बिजासन धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट अध्यक्ष एस वीरास्वामी सहित विष्णु प्रसाद यादव, मोहन जोशी, अजय महाजन, विकास आर्य, नीरज कानूनगो, सत्यनारायण मालवीय, नितिन धाकड़, संतोष सिंह, राजेश जोशी, रवि मोहनलाल शर्मा, बजरिया भाई आदि पदस्थ है।