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332.56 करोड़ खर्च कर पक्की की जाएंगी 40 साल पुरानी नहरें

- तिलवारा बायीं तट नहर से सिंचाई के लिए पानी में आती है समस्या

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नहरों को सफाई-सीमेंटीकरण का इंतजार।

नहरों को सफाई-सीमेंटीकरण का इंतजार।

सिवनी. जिले की सबसे बड़ी और पुरानी संजय सरोवर परियोजना की 40 साल पुरानी नहरों की मरम्मत के लिए 332.56 करोड़ का प्रस्ताव केन्द्रीय जल आयोग दिल्ली से स्वीकृति हो चुका है। टेंडर भी लग चुके हैं। 15 मार्च के बाद काम की शुरुआत की जा सकेगी।


तिलवारा बायीं तट नहर संभाग केवलारी के कार्यपालन यंत्री उइके ने बताया कि संजय सरोवर परियोजना तिलवारा बांयी तट नहर संभाग केवलारी अंतर्गत आरबीसी एवं एलबीसी नहरें 40 साल पूर्व बनी हुई है। परियोजना का सीसीए मात्र 32610 हेक्टेयर रबी सिंचाई के लिए था एवं सिंचाई सिर्फ बहाव (कोलावा) से करने का प्रावधान है तथा स्थानीय गेहूं एवं बीटर (चना, तिवड़ा, मसूर, अलसी, सरसों) लगभग 25 से 30 प्रतिशत बोआई प्रावधान है, जिसमें मात्र एक पलेवा, एक पानी फसलों के लिए पर्याप्त होता है। बांध सिंचाई की संपादित क्षमता में विद्युत डीजल मोटर-पंपों आदि से कमांड ऑफ कमांड में सिंचाई करने का प्रावधान नहीं है।


बताया कि वर्तमान में सिंचाई का रकबा 75800 हेक्टेयर हो चुका है, जिसमें लगभग 99 प्रतिशत रकबे में किसानों द्वारा हाईब्रिड गेंहूं की बुआई की जाती है एवं अत्यधिक रसायनिक खाद्य का उपयोग किए जाने से फसल पकने के लिए कम से कम 4 से 6 पानी की आवश्यकता होती है तथा हेड क्षेत्र के किसानों द्वारा 12 से 15 दिन में संगठित होकर मनमानी करते विभागीय कर्मचारी-अधिकारियों पर दबाव बनाकर नियम विरूद्ध नहर के जल द्वार खोल दिए जाते हैं अथवा क्षतिग्रस्त किए जाने हैं बड़े-बड़े अडावा नहरों में लगाए जाते हैं, जिससे नहर क्षमता से अधिक पानी बहाव के कारण नहर क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जिस कारण टेल क्षेत्र में किसानों को समय पर पानी नही मिल पाता है। जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में पांच नवम्बर को लिए गए निर्णय अनुसार 15 नवम्बर को बांध की दोनों नहरों में सिंचाई के लिए पानी प्रवाहित किया गया। दोनों मुख्य नहरों में पानी पहुंचाने के बाद (टेस्टिंग पश्चात) 25 नवम्बर से विधिवत दांयी तट नहर में पानी प्रवाहित किया गया। 15 दिसंबर से 20 दिसंबर 2024 के मध्य पलेवा कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।


इस नहर की मरम्मत के लिए संजय सरोवर परियोजना का ईआरएम का 332.56 करोड़ का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए केन्द्रीय जल आयोग दिल्ली से हो चुका है। टेंडर भी लग चुके हैं, शीर्घ कार्य प्रारंभ की कार्यवाही की जा रही है। कार्यपालन यंत्री ने बताया कि भीमगढ़ दांयी तट नहर के अंतर्गत टेल क्षेत्र के ग्रामों में पलेवा एक पानी प्रस्तावित किया जाकर लोकल गेंहूं (कम पानी वाली) एवं बीदर चना, तेवड़ा, मशूर, अलसी, मटर, सरसों आदि की बुआई किया जाना प्रस्तावित है। अलोनीखापा, भादूटोला, पीपरदौन, झोला, कुम्हडा, बगलई, डोकररांजी, जामुनपानी, मुनगापार, खैरी, मलारी, बिनेकी, कोहका, कछारी, मैरा, मैनापिपरिया ग्रामों में मात्र पलेवा एक पानी दिया जाना ही संभव है।
इसी तरह तिलवारा बांयीं तट नहर के अंतर्गत टेल क्षेत्र के ग्रामों में पलेवा ़एक पानी प्रस्तावित किया जाकर लोकल गेहू (कम पानी वाली एवं गीदड घना, तेवड़ा, मशहूर, अलसी, मटर, सरसों आदि की बुवाई किया जाना प्रस्तावित है।
खैरी, मलारी, पुतर्रा, किमाची, देहवानी, बुधवारा, डुमरिया, कोहका, रायखेडा, चांदनखेडा, तेंदुआ, सालीवाड़ा, खैररांजी, ग्वारी, केवलारी खेडा, बक्शी, बबरिथा, छीदा, बिछुआ, खुसीपार, माल्डनवाड़ा ग्राम में भीमगढ़ नहर अथवा केवलारी खेड़ा जलाशय (छींदा टेल जलाशय) से मात्र पलेवा का एक पानी दिया जाना ही संभव है।
इसी तरह अंतिम छोर के थांवर नदी से लगे गांव पोंगार, सरई के किसान जो कि पूर्व वर्षों से ही छींदा टेक-नहर के पानी पर निर्भर नहीं है। विद्युत मोटर पंपों से थांवर नदी से ही सिंचाई करते है। इन्हें टैंक-नहर से पानी दिया जाना संभव नहीं है। अस्थायी व्यवस्था स्थानीय जनप्रतिनिधियों, किसानों तथा विभागीय कर्मचारी-अधिकारियों से हुई चर्चा के मुताबिक किसानों, शासन हित में अस्थायी रूप से नहरों की लाईनिंग होते तक लागू रहेगी।