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साहित्य – माटी मेरे गांव की, बहुत मुझको लुभाती है….

व्यंग्य, ओज, करूणा, वात्सल्य, संवेदना के बिखरे स्वर

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साहित्य - माटी मेरे गांव की, बहुत मुझको लुभाती है....

साहित्य - माटी मेरे गांव की, बहुत मुझको लुभाती है....

सिवनी. वनवासी विकास परिषद सिवनी द्वारा परिषद के संस्थापक बाला साहेब देशपाण्डे के जन्मदिवस के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर भैरोगंज में किया गया। इस कार्यक्रम में भवानी सिंह वाडि़वा प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य (रिटायर न्यायाधीश), आशुतोष वाडि़वा प्रांतीय सह सचिव, जिले के संरक्षक दुर्गाशंकर श्रीवास्तव, अध्यक्ष विजयसिंह बघेल एवं नाथूराम धुर्वे व अन्य की उपस्थिति रही।
काव्यपाठ में वरिष्ठ कवि एवं डॉ. पुष्पा तेकाम, जगदीश तपिश, साहिब लाल दशहरिया, डॉ. रामकुमार चतुर्वेदी, रमेश श्रीवास्तव, डॉ. रामभुवन सिंह ठाकुर, अखिलेश प्रतिमा श्रीवास्तव, विनोद सनोडिया, संजय जैन संजू, पूनाराम कुल्हाडे, अ. कलाम अंसारी, नोखेलाल रजक, प्रहलाद सिंह धुर्वे, रामप्रसाद चौरसिया, रामगोपाल ताम्रकार, प्रेमसिंह धनगढी, कृष्ण कुमार सिसोदिया, अक्षय धुर्वे, सुरेन्द्र सिंह सिसोदिया, देवेन्द्र ठाकुर व अन्य शामिल थे।
काव्य पाठ करते हुये डॉ. पुष्पा तेकाम ने कहा कि ठगा गया कैसा, ठगा सा गया आदमी। वीर रस की ओज पूर्ण रचना युवा कवि अक्षय दुबे ने रखते हुये कहा मौसम चुनाव का जो देश में है चल रहा, नेता पाँव चाटने को घर चले आएंगे। घूमते है नेता आगे पीछे आज आपके जो, अजगरों के जैसा पूरा देश लील जाएंगे।
अमरवाडा से आए कवि विनोद सनोडिया ने कहा वो माटी मेरे गांव की, बहुत मुझको लुभाती है, रहूं चाहे जहां मैं वो अपने पास बुलाती है। छपारा के कृष्ण कुमार सिसोदिया ने कहा ये भारत मां की रज चंदन ये शूरवीर की जननी है, ये पावन गंगा का उद्गम, जो अमृत की निझरनी है। कुरई के राष्ट्रीय कवि सुरेन्द्र सिसोदिया ने कहा भगत सिंह का जन्म न होगा, होगी न झांसी रानी, दुर्गावती अब नहीं आएगी, न शेखर सा बलिदानी। तुमको खुद बलिदानी बनकर डटकर के लडऩा होगा, इंकलाब का स्वर बुलंद अब खुद तुमको कराा होगा। डॉ. रामभुवन सिंह ठाकुर ने कहा अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी, नम सम हदय विशाल, भारत जननी धन्य हुई पाकर अटल सा लाल। ओज से ओतप्रोत रानी दुर्गावती की गाथा प्रतिमा अखिलेश ने रखते हुये कहा कहता है आख्यान दुर्ग ये गढ़ मंडल की रानी का, याद रहेगा युगों-युगों संग्राम समर भवानी का।
डॉ. रामकुमार चतुर्वेदी ने कहा राम धैर्य है सत्य प्रेम के, राम मधुर रस बोली है। राम-राम में रम जाते जो रामलला की टोली है। साहेबलाल दशहरिया ने कहा भाई-भाई के बीच की खाई को पाटनी चाहिए, सरस संबंधो की चासनी को चाटनी चाहिए। अ.कलाम अंसारी ने कहा मोहब्बत हो वतन से, यही इस्लाम कहता है, हम अपने दिल में हिन्दुस्तान रखते हैं। संजय जैन संजू ने कविता प्रस्तुत करते हुये कहा शब्दकोष के कुछ अक्षर हैं अटल की अमृतवाणी में, जलते प्रश्नों के उत्तर हैं अटल की अमृत वाणी में। आंसू की भी एक अलग अपनी ही भाषा होती है। पीड़ाओं के गूंगे स्वर हैं अटल की अमृतवाणी में।

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