28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महुआ बना ग्रामीणों के लिए रोजगार का साधन

जंगल में चारों ओर महुआ फूल की बिखर रही खुशबू

2 min read
Google source verification
Money making tips! Debt fund  investment help you earn good return

Money making tips! Debt fund investment help you earn good return (PC: Groww)

सिवनी. महुआ के फूल का नाम लेते ही लोगों के जेहन में सबसे पहले महूए से बनने वाली शराब का ही ख्याल आता है, लेकिन वही महुआ फूल ग्रामीणों को ऐसे समय में रोजगार देता है जब वे बेरोजगार होते हैं, क्योंकि इससे केवल शराब ही नहीं बनती बल्कि औषधियों के निर्माण में भी महुआ अहम भूमिका निभाता है। ग्रीष्म काल के दौरान खेतिहार मजदूरों को जब काम नहीं मिलता तो वे महुआ एकत्रित कर इसे बेचने का कार्य करते हैं। इन दिनों गांव में पीला सोना कहे जाने वाले महुआ फूल टपकना शुरू हो गया है। ग्रामीण सुबह से ही महुआ फूल का संग्रह करने खेतों और जंगलों का रुख कर रहे हैं।
आदिवासी अंचल घंसौर क्षेत्र में इन दिनों गांव-गांव में लोग महुआ संग्रहण करते देखे जा सकते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जंगल के चारों ओर महुआ फूल की मादक खुशबू बिखर रही है, जिससे राहगीर भी आकर्षित हो रहे हैं। महुआ फूल समेटने के लिए ग्रामीण पूरे परिवार के साथ सुबह से ही जंगलों व खेतों की ओर चले जाते हैं। इस दौरान सुरक्षा के लिए हाथ में लाठी व महुआ फूल रखने के लिए टोकरी साथ लेकर जाते हैं। सूर्य उदय होने के बाद फूल गिरना कम हो जाते हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि महुआ के पेड़ किसानों के लिए कल्पवृक्ष से कम नहीं है, क्योंकि जहां इस पेड़ के फूल बिकते हैं वहीं इस पेड़ की पत्तियां भी काम आती हैं। इस पेड़ की पत्तियों से ही पत्तलो का निर्माण होता है इसके फूलों से तेल भी निकाला जाता है साथ ही यह पेड़ प्राकृतिक रूप से काफी बड़े होते हैं। इस पेड़ को खाद-पानी की भी आवश्यकता नहीं होती, इसी कारण महुआ के पेड़ नागरिकों व किसानों की आय के महत्वपूर्ण साधन है। महुआ फूल से तैयार किए गए राब का उपयोग प्राचीन लोग भोजन में किया करते थे इसी कारण से लड्डू, पापड़ी, अचार आदि खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं। यही नहीं इससे बनने वाला शरबत ग्रीष्म काल में शरीर के लिए काफी लाभदायक होता है। यह महुआ फूल जितना इंसानों के लिए लाभदायक है उतना ही मवेशियों के लिए भी उपयुक्त है। गाय, बैल, भैंस आदि पालतू पशुओं को महुआ खिलाया जाता है।
महुआ कमाल का सदाबहार छायादार वृक्ष है इसके हर भाग व अंग न केवल मनुष्यों के लिए बल्कि छोटे-बड़े जीव जंतुओं के लिए भी उपयोगी होते हैं। तपती गर्मी में इसकी ठंडी छांव में मनुष्य व वन्यजीव सुकून पाते हैं। यह कई पक्षियों का सुरक्षित आश्रय है जहां यह बिना किसी भय से अपनी वंश वृद्धि करते हैं, यह वृक्ष प्राणवायु का बड़ा व बेहतरीन स्रोत है। इसके आसपास के वातावरण में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन होती है गरीब तबके के लोगों को महुआ से साल भर के लिए इंधन के लिए जलाऊ लकड़ी मिल जाती है इसकी छालए फल व फूल में औषधीय गुण होने से इनका उपयोग आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता है भोजन के लिए इसके पत्तों से पत्तल दोने बनाए जाते हैं जो प्रदूषण रहित होते हैं इसकी पत्तियां व फूल पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं इसलिए यह पशुओं के लिए बेहतरीन पोस्टिक आहार होते हैं इनको खिलाने से पशुओं में दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में ही बढ़त होती है।