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खूब लड़ी मर्दानी….

कई युगों बाद आती है सुभद्रा जैसी महान विभूति

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खूब लड़ी मर्दानी....

खूब लड़ी मर्दानी....

सिवनी. खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी... जैसी अमर कविता से देश में स्वतंत्रता के दीवानों में वीरता का उत्साह जगाने वाली कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान का सिवनी जिले के कलबोड़ी में सड़क हादसे में निधन हुआ था, उसी स्थान पर हर वर्ष पुण्यतिथि पर ग्रामीण कवियित्री को याद करते हैं।

स्वतंत्रता सेनानी एवं सुप्रसिद्ध कवियित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की पुण्यतिथि सिवनी मुख्यालय से नागपुर रोड पर ग्राम कलबोड़ी में सुभद्रा स्मारक पर मनाई गई। उपस्थित साहित्यकारों, कवियों व नागरिकों ने सुभद्रा स्मारक पर पुण्य अर्पित कर श्रृद्धांजलि दी गई। इसके उपरांत स्कूल छात्र छात्राओं के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। स्वर सामाज्ञी लता मंगेशकर को भी इस अवसर पर श्रृद्धांजलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए आयोजन समिति की सदस्य आशा चंदेल ने कहा कि सुभद्रा कुमारी चौहान जैसी महान विभूति कई युगों बाद पैदा होती है। सभा को मनीषा चौहान ने भी संबोधित किया एवं अनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रारंभ से सुरेन्द्र सिसोदिया अनुज ने कवियित्री सुभद्रा के स्मारक निर्माण् एवं उनकी स्मृति में विगत 25 वर्षो से कार्यक्रम के आयोजन के संबंध में प्रकाश डाला एवं इसमें मोहन सिंह चन्देल के योगदान की सराहना की। सुनीता सनोडिया ने अपनी बात रखी।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में कवियों ने रचना प्रस्तुति से कवित्री को याद किया। कुरई क्षेत्र निवासी भारत बरोही ने काव्यांजलि प्रस्तुत करते हुए कहा कि सुन जवानी खून तेरा न हो न पानी, युग काल जाए रहे तेरी निशानी। चलना क्या उनका जो कहकर लौट आए। चलते रहना ही तो है जिन्दगानी। महाकौशल क्षेत्र के सुप्रसिद्ध कवि सुरेन्द्र सिसोदिया अनुज ने कहा मैं सिधु नदी के तीर रहूं या गोदावरी की घाटी में। मैं साधु संत फकीर रहूं या रहूं परिपाटी में। अंत में सभी छात्रों को पारितोषिक वितरण किए गए। मंच संचालक धनंजय सिंह ने किया। इस अवसर पर अरविंद राजपूत, शक्रवार, वीणा राजपूत, राजेश चौहान, दुलीचंद देशमुख, कलीम खान, जीवन सिंह चन्देल, गुल्लू बाबा, रिंकू साहू एवं अध्यापक व ग्रामवासी उपस्थित रहे।