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पेंच टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र व सिवनी को मिलेगा ‘टाइगर कंजर्वेशन पुरस्कारÓ

- बाघों की संख्या दोगुनी करने पर आईयूसीएन और डबल्यूडबल्यूएफ करेगा पुरस्कृत- वर्ष 2006-18 के बीच हो संख्या हो गई दोगुनी से अधिक- डिप्टी डायरेक्टर बोले, वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग सम्मेलन में मिला था लक्ष्य

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पेंच टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र व सिवनी को मिलेगा 'टाइगर कंजर्वेशन पुरस्कारÓ

पेंच टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र व सिवनी को मिलेगा 'टाइगर कंजर्वेशन पुरस्कारÓ

सिवनी. दुनियाभर में विख्यात पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी की उपलब्धि में अब एक और तगमा जुडऩे वाला है। पेंच टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र व सिवनी को संयुक्त रूप से 'टाइगर कंजर्वेशन पुरस्कारÓ के लिए चुना गया है।

डब्लूडब्लूएफ की वेबसाइट पर इसकी सूचना जारी हुई है। पुरस्कार कब दिया जाएगा। इसकी सूचना अभी नहीं दी गई है। यह पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आईयूसीएन और डब्लूडब्लूएफ संयुक्त रूप से देती है। इसकी पुष्टि पेंच के डिप्टी डॉयरेक्टर रजनीश सिंह ने की है।


डिप्टी डॉयरेक्टर सिंह ने बताया कि वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में जिन देशों में बाघ पाए जाते हैं। वे सभी शामिल हुए थे। सम्मेलन में दुनियाभर में बाघों की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त की गई थी। साथ ही उसे बढ़ाने पर बात हुई थी।

वर्ष 2006 से 2020 तक बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया था। पेंच टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र व सिवनी ने वर्ष 2018 तक बाघों की संख्या दोगुनी से अधिक कर ली। इसके लिए पेंच टाइगर रिजर्व ने नामांकन कर बाघों की संख्या दोगुनी से अधिक होने की जानकारी दी थी।

बताया कि बाघों की संख्या कैसे बढ़ी और इसके लिए क्या प्रबंधन किया गया था? इसकी जानकारी भी मांगी गई थी। इसे हमने विस्तार से बताया है।


ऐसे बढ़े बाघ
पेंच टाइगर रिजर्व महाराष्ट्र क्षेत्र में वर्ष 2008-09 में नौ बाघ थे। वर्ष 2021 में बढ़कर 44 हो गए। सिवनी क्षेत्र में वर्ष 2006 में 33 बाघ थे, जो वर्ष 2018 में बढ़कर 87 हो गए। महाराष्ट्र व मप्र के सिवनी क्षेत्र में वर्तमान समय में 131 बाघ हैं।