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सिवनी-जबलपुर ब्रॉडगेज से बदलेगी जिले की तस्वीर

नागरिकों को सांसदों के हैं आपेक्षाएं

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सिवनी. जबलपुर से धूमा के पास सुकरी गांव तक बड़ी रेल लाइन की पटरी पर रेल ने दौडऩा शुरू कर दिया है। इसे सिवनी से जोडऩे से हम छिंदवाड़ा होते हुए भोपाल, दिल्ली और नागपुर से जुड़ जाएंगे। इस समय चारों तरफ रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिल रही है। वहीं नागरिकों व समाजसेवियों ने दोनों सांसदों पर इस मामले में कोई प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया है। वहीं फोनलेन आंदोलन के सक्रिय सदस्य संजय तिवारी का कहना है कि सिवनी को जबलपुर से जोडऩे से जिले के विकास की तस्वीर ही बदल जाएगी।
जबलपुर से घंसौर स्थित पावर प्लांट में कोयले की आपूर्ति के लिए बड़ी रेल लाइन बिछाई गई है। ये लाइन धूमा से सिवनी तक बिना पर्यावरणीय अड़चनो के बिछाई जा सकती। 2019 तक हम मण्डला-सिवनी- छिंदवाड़ा ब्रॉडगेज परियोजना के पूर्ण होने के साथ ही छिंदवाड़ा से जुड़ जाएंगे। छिंदवाड़ा पहले से ही भोपाल व दिल्ली से जुड़ा है और नागपुर से जुडऩे वाला है। ऐसे में जबलपुर से सिवनी तक बड़ी रेल लाइन की पटरी बिछाने से मध्य भारत की तस्वीर ही बदल जाएगी जबकि रेल के माध्यम से उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोडऩे वाली दूरी में कम से कम 250 किलोमीटर कम हो जाएगा। सिवनी देश के सबसे बड़े इटारसी जंक्शन का बेहतरीन विकल्प बन जाएगा।
रामटेक-गोटेगांव परियोजना की मांग पर हुए सर्वे ने इस परियोजना को व्यवहारिक नही बताया है। गौरतलब है कि किन्हीं दो स्थानों को बड़ी रेल लाइन से जोडऩे के लिए रेलवे मंत्रालय उन स्थानों के बीच यात्रियों की सघनता और परिवहन किए जाने वाले कच्चे पक्के माल की उपलब्धता देखता है। रामटेक गोटेगांव के बीच इन दोनों प्रमुख कारकों की कमी है। जबकि जबलपुर से सिवनी होते हुए नागपुर तक कम से कम सौ यात्री बस प्रतिदिन चलती है और जबलपुर-नागपुर के बीच परिवहन के लिए माल की उपलब्धता कहीं ज्यादा है। सिवनी से नागपुर के बीच सीधे रेल लाइन की पटरी बिछाने के लिए पर्यावरण की मंजूरी मिलना कठिन जरूर है पर असम्भव नही है। फिलहाल सिवनी को छिंदवाड़ा से होते हुए नागपुर से जोड़ा जा सकता है।
बालाघाट को जबलपुर से, नैनपुर को जबलपुर से, कटंगी को बालाघाट से जोडऩे की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। नरसिंहपुर को छिंदवाड़ा से जोडऩे के प्रयास जारी है परन्तु सिवनी रेल मार्ग के भौगोलिक नक्शे के रूप में सबसे आदर्श स्थान पर है उसकी चिंता कोई नही कर रहा है। ऐसे में हम वर्षों पिछड़ जाएंगे क्योंकि जबलपुर-नरसिंहपुर-छिंदवाड़ा-नागपुर या भोपाल रेल मार्ग प्रारम्भ होने के बाद सिवनी की उपयोगिता ही खत्म हो जाएगी।