
वैनगंगा आरती करते श्रद्धालु।
सिवनी. भगवान श्रीहरि के परमप्रिय पुण्य मास कार्तिक के प्रथम पक्ष में वैनगंगा नदी के लखनवाड़ा तट पर गंगा पूजन, विष्णु सहस्त्रनाम, लक्षार्चन, लक्ष्य दीपदान एवं सत्यनारायण भगवान की कथा पूजन और संध्या में मां वैनगंगा की महाआरती की गई। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उत्सहित धर्म प्रेमियों ने धर्म लाभ लिया।
कार्तिक माह के दूसरे पक्ष में भी यह आयोजन यथावत जारी है। आयोजन समिति के सोनू महाराज ने बताया कि पवित्र कार्तिक माह में उत्तर भारतीय धर्मावलबियों का छठ पूजा त्योहार महत्वपूर्ण होता है, जिसमें छठ व्रत करने वाली महिला त्योहार के एक दिन पूर्व ही अर्थात पंचमी तिथि से ही निराहार व्रत करती हंै और तीसरे दिन उगते सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत पूर्ण करती हैं। इस वर्ष छट पूजा का त्योहार के लिए व्रतियों को पवित्र वैनगंगा के लखनवाड़ा तट पर सात नवम्बर की शाम डूबते सूर्य को अघ्र्य देना होगा। वहीं उगते सूर्य को अघ्र्य देने के लिए आठ नवम्बर को प्रात: पुन: तट पर ही सूर्य को अघ्र्य देकर व्रत पूर्ण करना होगा। सोनू महाराज ने बताया कि षष्ठी तिथि की शुरुआत सात नवंबर को रात 12 बजकर 41 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन आठ नवंबर को रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा।
वैनगंगा तट पर भागवत कथा सप्ताह का आयोजन
सात नवम्बर से 15 नवंबर तक पवित्र वैनगंगा तट लखनवाड़ा में दोपहर 1:30 बजे से शाम पांच बजे तक कथा व्यास प्रेमकृष्ण पुरूषोत्तम तिवारी के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह का सुंदर आयोजन क्षेत्रीयजनों की उपस्थिति में किया जाएगा। भगवत प्रेरणा से गोमाता एवं प्रकृति को प्रसन्न करने के उद्देश्य से वैनगंगा तट लखनवाड़ा पर भगवान को अतिप्रिय गो, गीता एवं गंगा का पूजन पठन एवं विष्णु अर्चन के साथ श्रीमद् भागवत महापुराण का आयोजन कार्तिक शुक्ल षष्ठी से कार्तिक पूर्णिमा पर्यन्त होगा।
विशेष संयोग में आयोजन
कार्यक्रम में अत्यंत विशेष संयोग प्राप्त हो रहे हैं। सर्वप्रथम सूर्य षष्ठी को भगवान सूर्य नारायण की आराधना से कार्यक्रम का प्रारम्भ होगा। इसके उपरान्त गोपाष्टमी उत्सव के दिन गो माता का पूजन, अक्षय नवमी जिस दिन पुण्य कर्मों के करने का अक्षय फल प्राप्त होता है, उस दिन कथा श्रवण का सौभाग्य मिलेगा। इसके पश्चात प्रबोधिनी (देवउठनी एकादशी) जिस दिन सभी मांगलिक कार्य होते हैं। ऐसे शुभ दिन श्रीमद् भागवत एवं गीता पाठ के श्रवण का सौभाग्य बैकुंड चतुर्दशी को कथा श्रवण का सौभाग्य एवं प्रतिदिन षष्ठी से पूर्णिमा तक दीपदान का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। आयोजन समिति ने सभी धर्म प्रमियों से उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया है।
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Published on:
06 Nov 2024 05:18 pm
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