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दोनों शिक्षकों को हटाओ, तब बच्चों को भेजेंगे स्कूल

- अभिभावकों ने एक सप्ताह से बच्चों को स्कूल भेजना किया बंद - जांच अधिकारी की समझाइस पर भी नहीं माने अभिभावक व ग्रामीण

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शिक्षकों से नाराज अभिभावक व बच्चे।

शिक्षकों से नाराज अभिभावक व बच्चे।

सिवनी/मोहगांव. आदिवासी बाहुल्य विकासखंड कुरई के अंतर्गत ग्राम पंचायत परतापुर के उन्नयन प्राथमिक शाला दमझिर फैजपुर के अभिभावक और स्कूली बच्चे शिक्षक से नाराज हैं। जिससे पिछले एक सप्ताह से बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। अभिभावकों ने जांच के लिए पहुंचे बीआरसीसी कुरई से भी स्पष्ट कह दिया है, कि जब तक दोनों शिक्षक नहीं हटाए जाएंगे, तब तक हम बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।


शिकायतकर्ता अभिभावक व ग्रामीण तीज कुमार इनवाती पीटीए अध्यक्ष, बिशन लाल परते, अजय कुमार मेश्राम, विजय कुमार मेश्राम, रमेश मर्सकोले, छत्रपति मर्सकोले रसोईया, मीना बाई ने कहा कि जब तक दोनों शिक्षक को नहीं हटा दिया जाता। तब तक हम बच्चों को शाला नहीं भेजेंगे।


अभिभावकों एवं स्कूली बच्चों ने बताया कि दमझिर में दो शिक्षक पदस्थ हैं। वहीं कक्षा पहली से पांचवी तक कुल 10 बच्चे अध्यनरत हैं। बताया कि इस स्कूल में जुलाई माह से अभी तक मध्यान्ह भोजन नहीं बनाया गया। अभिभावकों ने इस सम्बंध में पूछताछ किया तो शिक्षक अपने घर से खुद दो-तीन टिफिन के डिब्बे में चावल घर से ले आते हैं और बच्चों से घर से सब्जी लाने को कहते हैं। इस तरह से मध्यान्ह भोजन की खानापूर्ति कर थोड़ा-थोड़ा चावल बच्चों को दे दिया जाता है। जबकि बच्चों को घर से सब्जी लाकर मध्यान्ह भोजन करना पड़ रहा है।
अभिभावक व ग्रामीणोंं का आरोप है कि प्रधानपाठक व शिक्षक गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण जंगल में जाकर मोबाइल देखते रहते हैं। बताया कि इसकी शिकायत आदिवासी विकास विभाग कार्यालय सिवनी में 30 सितंबर को दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत के बाद एक अक्टूबर से आज दिन तक बच्चे शाला नहीं जा रहे हैं। शाला में सिर्फ शिक्षक ही आ रहे हैं।


इनका कहना है -
कुरई ब्लॉक के दमझिर के स्कूली बच्चों का पढऩे नहीं जाने का मामला संज्ञान में आया है। विकास खंड अधिकारी अनुराग रावल को मौके पर भेजकर जांच करने को कहा है। पूरी जानकारी मिलने पर ही इस मामले में आगे कुछ किया जा सकेगा।
एसआर मरावी प्रभारी एसी, आदिवासी विकास विभाग सिवनी

जिला शिक्षा केन्द्र समन्वयक के निर्देश पर दमझिर प्राथमिक शाला जाकर जांच की गई है। शिकायतकर्ता अभिभावकों, शिक्षकों, रसोईयों का बयान लिया है। ग्रामीण शिक्षकों को वहां हटाने पर ही बच्चों को स्कूल भेजने की बात पर अड़े हैं। फिर भी उन्हें समझाइस दी है। शिक्षकों को भी समन्वय बनाने को कहा है। जांच प्रतिवेदन वरिष्ठ कार्यालय को सौंपा जाएगा।

पीडी नाग, बीआरसीसी सिवनी