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१५७ साल से कायम है सिवनी के इस चर्च की खूबसूरती, आप भी देखिए

नायाब कारीगरी वाले इस चर्च में अंग्रेज करते थे प्रार्थना

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The beauty of this church of Sivan, which has remained for 157 years, also see

सिवनी. सर्किट हाउस के सामने स्थित पत्थर वाला चर्च १५७ साल से अपनी खूबसूरती से लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। पत्थर वाला चर्च आज भी उसी मजबूती से खड़ा है, जिस मजबूती से इसका निर्माण किया गया था। १५७ साल का अंतराल कम नहीं होता। इतने साल पहले भी सिवनी की कितनी अहमियत थी, इस बात की गवाही यहां ब्रिटिश हुकूमत में बनवाए गए पत्थर वाले चर्च को देखकर, इतिहास जानकर समझा जा सकता है। तभी तो शहर में ऐसी वास्तुकला, बनावट और भव्यता की निशानी आज भी खूबसूरती के साथ कायम हैं। जिसकी हर कोई तारीफ किए बिना नहीं रहता। क्रिसमस के एक दिन पूर्व रविवार को चर्च को भव्यता से सजाया गया। यहां बड़ी संख्या में ईसाई धर्मावलंबी व अन्य धर्म के लोग पहुंचकर प्रार्थना करेंगे।
इसलिए खास रहा है सिवनी -
ब्रिटिश हुकूमत के समय भी सिवनी एक अहम पड़ाव हुआ करती थी। अंग्रेज अफसर हों या मिलिट्री सभी जबलपुर-नागपुर या देश के इस छोर से उस छोर की यात्रा यहीं से होकर किया करते थे। पास्टर कमेटी के सदस्यों ने बताया कि ब्रिटिश शासन में भी सिवनी खास था, इसलिए उन्होंने सिवनी को छावनी बनाया था। इसके लिए जगह चुनी गई थी, सिवनी में मेन रोड किनारे वर्तमान सर्किट हाउस के सामने की जमीन। सफर करते ब्रिटिश अफसर, जवान यहां छावनी में लगे तंबू में ठहरते थे। इसी दौरान ब्रिटिश हुकूमत ने यहां सीएनआई सिवनी पत्थर वाले चर्च का निर्माण करीब १८६० में कराया था। यहां सभी प्रेयर किया करते थे।
कारीगरी भी हुई लाजवाब -
करीब १५७ साल पहले आज जितने कुशल उपकरण और मशीनें नहीं थीं, इसके बावजूद भी जो लाजवाब कारीगरी इस चर्च में दिखाई देती है वो हैरत में डालती है। आज के दौर में संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद इस तरह की इमारतें बनना सहज संभव नहीं है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण में जा चुके इस चर्च को सुरक्षित रखने शासन ने तो कोई प्रयास नहीं किए, लेकिन क्रिश्चियन समाज कमेटी ने इसे सहेज रखा है। इसी कमेटी के सचिव शर्मिला बी कुमार ने बताया कि यह चर्च पूरी तरह पत्थरों से बना है, जो बाहर से लाए गए थे, पत्थरों को इतनी खूबसूरती और सफाई से इस्तेमाल किया गया कि देखते ही बनता है। चर्च में एक ओर मीनार है, जिस पर प्रेयर के समय एक घंटा बजता था। चर्च के भीतर भीतर ईशू मसीह का क्रास लगा है, वहीं छत, दरवाजे और बैंच इतने सालों के बाद भी कमजोर नहीं हुए हैं। इनमें भी खास कारीगरी देखने को मिलती है।
आते रहे हैं देशी-विदेशी पर्यटक -
ब्रिटिशकाल की ऐसी कारीगरी पूरे मप्र में सिवनी के अलावा कहीं और देखने को नहीं मिलती। इसे देखने देशी-विदेशी पर्यटक भी आते रहे हैं। हालांकि अब यह ऐतिहासिक धरोहर सडक़ से नजर नहीं आती। इसके सामने पुलिस कंट्रोल रूम की सरकारी बिल्डिंग खड़ी कर दी गई है।