सिवनी. हजारों एकड़ जमीन पर पानी की कमी के कारण खेती नहीं हो पा रही है। किसान पेट पालने के लिए परिवार सहित शहरों की तरह मजदूरी करने जा रहे हैं। ऐसे हालात का सामना कर रहे लखनादौन, धूमा क्षेत्र के 40 से ज्यादा गांव के एक सैकड़ा किसानों ने शुक्रवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने पर नारेबाजी की। किसानों ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर कहा है कि क्षेत्र में बरगी बांध से नर्मदा का जल मिल जाए तो उनके सूखे खेतों में भी हरियाली और जीवन में खुशहाली आ जाएगी। कहा कि यदि उनकी मांग पर शासन-प्रशासन ने शीघ्रता से समाधान नहीं किया तो लखनादौन विधानसभा क्षेत्र के हजारों किसान प्रदर्शन के लिए पैदल भोपाल जाएंगे।
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि लखनादौन, धूमा क्षेत्र की धरातलीय बनावट निचली काले पत्थर की सतह वाली है। यहां पर बरसाती पानी बिना रूके नालों के माध्यम से बह जाता है। क्षेत्र में ऐसी कोई बड़ी नदी नहीं है, जां पर बांध बनाकर क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था की जा सके। क्षेत्र की राजस्व भूमि के रकबे से वनभूमि का रकबा अधिक है। क्षेत्रवासी कृषि पर आश्रित हैं और इसी के सहारे जीवन-यापन करते हैं।
क्षेत्रीय किसान व सांसद प्रतिनिधि रविशंकर यहके के अलावा ज्ञानप्रसाद सिरवैया नागनदेवरी, जुगलकिशोर पटेल नागनदेवरी, सत्येन्द्र सिरवैया, जगमोहन, लक्ष्मीनारायण पटेल, शिव कुमार, महेन्द्र व अन्य ने कहा कि अगले 15 दिन में समाधान होना चाहिए अन्यथा एक दिन तहसील लखनादौन में प्रदर्शन होगा। इसमें भी समाधान के लिए शासन-प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो हजारों किसान प्रदर्शन के लिए पैदल भोपाल कूच करेंगे।
दूसरे जिलों को मिल रहा पानी
लखनादौन विधानसभा क्षेत्र की सीमा पर बरगी बांध बना हुआ है। जिसमें क्षेत्र की जमीन भी डूब में आई है। बरगी बांध से वर्तमान में नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव विधानसभा तथा जबलपुर जिले की पाटन विधानसभा क्षेत्र में जो कि प्राकृतिक जल भंडार वाले क्षेत्र में जहांं पर 50 से 100 फीट गहराई पर नलकूप बारहमासी पानी देते हैं। इसके बावजूद वहां पानी दिया जा रहा है। इसी तरह बरगी बांध से ही बड़ी नहर के माध्यम से सतना जिले और जबलपुर जिले के सिहोरा मझौली क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी देने का काम प्रगति पर है। जबकि सिवनी जिले के लखनादौन, धूमा क्षेत्र में 500 से 1000 फीट नलकूप खनन करने के बाद भी पानी निकलने की संभावना कम ही रहती है। इसके बावजूद लखनादौन विधानसभा के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र के किसानों को वर्षों से हो रही मांग पर भी बरगी बांध से पानी नहीं मिल रहा है।
रबी सीजन में होती है 20 फीसदी खेती
किसानों ने बताया कि लखनादौन विधानसभा क्षेत्र की कुल कृषि भूमि में से मात्र 20 फीसदी भूमि पर ही पानी मिलने से रबी सीजन की खेती हो पानी है। क्षेत्रवासी मजदूरी के लिए अन्य राज्यों में पलायन के लिए मजबूर हैं।
सिंचाई समस्या का ये हो सकता है समाधान
कहा कि इस क्षेत्र के किसानों की सिंचाई की मांग का समाधान करने के लिए लखनादौन से मंडला मार्ग पर विधानसभा का अंतिम ग्राम रजरवाड़ा है। वहां से उत्तर दिशा में बरगी बांध का जलभराव क्षेत्र है, जिसकी दूरी 12 किमी है। वहां बड़ी मोटर से जल उद्वहन कर बड़ी पाइप लाइन के माध्यम से पानी रजरवाड़ा तक लायाजाए, वहां से नहरों के माध्यम से पूरे लखनादौन विधानसभा क्षेत्र में पानी पहुंचाया जा सकता है। जिसमें लखनादौन तहसील के किसानों की 84567 हेक्टेयर, घंसौर की 54270 हेक्टेयर की कुल 138837 हेक्टेयर भूमि के अलावा नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव तहसील के जल अभाव ग्रस्त नहर सिंचाई से वंचित भामा-गुर्रा, परमहंसी, उमरिया, तरवारा, नगरवारा की 8550 हेक्टेयार भूमि तथा जबलपुर जिले की बरगी विधानसभा का जल अभाव ग्रस्त क्षेत्र नहर सिंचाई से वंचित सूखा, नयानगर क्षेत्र की 7000 हेक्टेयर भूमि कुल 148087 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई व्यवस्था प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से कराने के लिए सर्वे कार्य करवाए जाने की मांंग प्रमुखता से उठाई है।
वन भूमि पर बांध बनवाने से बढ़ेगा जलस्तर
लखनादौन विकासखण्ड के नागनदेवरी क्षेत्र का जल स्तर साल दर साल नीचे जा रहा है। वर्तमान में यहां का जल स्तर 700 फीट पर पहुंच गया है। गहराई पर पानी होने से तत्वहीन है, जिसमें मनुष्यों में विभिन्न प्रकार की बीमारियां हो रही हैं एवं गोवंश भी स्वस्थ नहीं है। अहम बात ये है कि नागनदेवरी क्षेत्र वनभूमि है। यहां की कुल कृषि भूमि का रकबा वनभूमि से कम है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि वनभूमि पर बांध का निर्माण किया जाए, जिससे जल संग्रहण होगा एवं क्षेत्र का जल स्तर भी बेहतर हो सकेगा और जो नदियां सूख चुकी हैं, उनमें भी बारहमासी पानी बहने से क्षेत्र में समृद्धि आएगी।
अधिकारियों से किसानों को मिली जानकारी
किसानों ने बताया कि उन्हें जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि क्षेत्रीय ग्राम विजयपानी के आरएफ 719-50, ग्राम गाडरवाड़ा के आरएफ675-9, ग्राम सनाईकछार के आरएफ 58 में वनभूमि पर बांध निर्माण के लिए साध्यता स्वीकृति विभाग को प्राप्त हो चुकी है। इसके अलावा ग्राम खूट खमरिया के आरएफ727-53 एवं आरएफ 727- 57, ग्राम किलेटोला के आरएफ 727- 53, जमुनिया के आरएफ 691- 14 में, धनककड़ी क्षेत्र में सेढ़ नदी पर बांध निर्माण की साध्यता होता बताया गया है। किसानों ने कहा कि अटल भूजल संवर्धन योजना के अंतर्गत वनभूमि पर बांध निर्माण करने का आदेश जारी किया जाए।