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सिवनी

मातृ शक्ति संगठन की मांग को सरकार ने लिया संज्ञान, टूटने से बचेगा शहीद का परिवार

– मुख्यमंत्री शहीद को दी जाने वाले सहायता राशि माता-पिता व पत्नी में बांटने के फैसले की सराहना की
– अध्यक्ष बोली, हमारी मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शहीद की राशि 50 लाख से बढ़ाकर किया था एक करोड़

सिवनीJun 29, 2024 / 06:48 pm

sunil vanderwar

संगठन के सदस्य तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपते हुए।

संगठन के सदस्य तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ज्ञापन सौंपते हुए।

सिवनी. मातृ शक्ति संगठन की लंबे समय से चल रही मांग पर सरकार ने अमल किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहीद के परिजनों को दी जाने वाली सहायता राशि का 50 फीसदी हिस्सा माता-पिता व 50 फीसदी पत्नी को दिए जाने के आदेश दिए है। उनके आदेश की संगठन ने सराहना की है। संगठन की अध्यक्ष सीमा चौहान ने बताया कि जवान के शहीद होने पर उसके परिवार को दी जाने वाली राशि को दो हिस्सों में दिए जाने की मांग हमलोग लंबे समय से कर रहे थे। इस संबंध में मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन सौंपा था।

अध्यक्ष ने कहा कि संगठन 17 सालों से शहीद परिवारों के सम्मान एवं उनके हक में न्यायोचित अवसर प्रदान कराने की लड़ाई लड़ रहा है। इसकी वजह से मातृ शक्ति संगठन राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना चुका है। जवान के शहीद होने पर उनके घर तक पहुंचना एवं उनकी परेशानियों का निवारण संगठन की प्राथमिकता में शामिल है।

अध्यक्ष चौहान ने कहा कि किसी भी शहीद परिवार की सबसे बड़ी विडंबना शहीद जवान की पत्नी वीर वधु को मिलने वाली राशि है, जो जवान के परिवारों को तोड़ रही है। संगठन के पास ऐसी अनेकों शिकायतें आती है, जिन्हें शहीद के माता-पिता करते है। उनके बेटे की शहादत के बाद अक्सर उनकी वीर वधु या तो परिवार से अलग हो जाती या अपने मायके चली जाती है।

ऐसी स्तिथि में माता-पिता के हक में कुछ नहीं आता और हालात तब और बिगड़ जाते हैं। जब मां-बाप का इकलौता बेटा देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे देता है। इसके बाद वे दर दर की ठोकरें खाते है, क्योंकि अब उनका ना तो कोई पालनहार है ना ही उनके पास पैसा होता है। संगठन ने ऐसे परिवारों से दूर-दूर तक जाकर मुलाकात की। वीर वधुओं को समझाने की बहुत कोशिश की। संगठन ने उनको बताया कि की उन्होंने केवल अपना पति नहीं खोया है, बल्कि बुजुर्ग माता-पिता ने अपना बेटा भी खोया है, लेकिन हमारी समझाइशों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला। वीर वधु थोड़ा सा समझने की कोशिश भी करें तो उनका मायका पक्ष उनकी लाड़ली को समझने नहीं देता।
ऐसे भी कई मामले संगठन के संज्ञान में आए, जहां मायके में भी वीर वधु को मिली राशि सुरक्षित नहीं रह पाई। इसीलिए बढ़ती हुई ऐसी शिकायतों को लेकर संगठन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को अवगत कराया था। उनसे मांग किया था कि इस राशि को दो भागों में दिया जाए ताकि माता-पिता भी निराश्रित न हो।

संगठन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के तृतीय कार्यकाल में उनसे मुलाकात कर भी इस विषय पर बात की थी, जिसमें उन्होंने संगठन की जायज मांग पर विचार करने की बात कही थी। अब संगठन की मांग पूरी हुई है, जिसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बधाई के पात्र है।
अध्यक्ष ने कहा कि सुकमा आतंकी हमले में शहीद हुए 19 जवानों में से एक मध्यप्रदेश के रीवा जिले से गंगतीरा गांव का बेटा नारायण सोनकर शहीद हुए थे। उनकी शहादत को नमन करने संगठन भी गंगतीरा पहुंचा था। उस समय शहीद परिवार को दी जाने वाली राशि 50 लाख थी। संगठन की मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस राशि को 50 लाख से एक करोड़ किया था।

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