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…और फिर बाघ ने किया एक महिला का शिकार

- मप्र राज्य वन विकास निगम बरघाट परियोजना के जंगल की घटना

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...और फिर बाघ ने किया एक महिला का शिकार

...और फिर बाघ ने किया एक महिला का शिकार

सिवनी. सिवनी के जंगल में अकेले जाना खतरे से खाली नहीं है। बाघ ग्रामीणों का शिकार कर रहे हैं। बरघाट थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कल्याणपुर के ग्राम जंगलटोला निवासी मीरन बाई (60) पति बाबूलाल पर हमला कर बाघ ने उनको मौत के घाट उतार दिया है। मीरन बाई जंगल में मंगलवार की सुबह तेंदूपत्ता तोडऩे गई थी। वनकर्मियों की माने तो बाघ के हमले के बाद उनका सिर धड़ से अलग हो गया है। शव के पिछले भाग का कुछ मांस भी बाघ ने खाया है।


जानकारी के अनुसार मप्र राज्य वन विकास निगम बरघाट परियोजना मंडल के बेहरई परियोजना परिक्षेत्र स्थित अंतरा बीट कक्ष क्रमांक 708 के जंगल में सुबह सात से आठ बजे मीरन बाई तेंदूपत्ता तोड़ रही थी। उसी समय घात लगाकर बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। तेंदूपत्ता तोडऩे गए दूसरे लोगों ने शोर मचाकर इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए।

सूचना के बाद बरघाट पुलिस व वनकर्मियों की टीम घटनास्थल पर पहुंंची। उस समय तक बाघ का मूवमेंट शव के पास बना हुआ था। अधिक संख्या में लोगों के आने और शोर मचाने से बाघ जंगल में भाग गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को ले जाने से मना कर दिया। संभागीय प्रबंधक के मुआवजा राशि दिए जाने के बाद ग्रामीण माने।

ग्रामीणों ने बताया कि बीते कुछ माह पूर्व बाघ ने लखनवाड़ा व कुरई थाना क्षेत्र में दो ग्रामीणों का शिकार कर मौत के घाट उतार दिया था। अब फिर एक बार बाघ ने एक महिला का शिकार किया है। इसके बाद से जंगल से लगे ग्राम के लोगों में दहशत फैल गई है।

ग्रामीणों को जंगल में जाने से किया गया मना
संभागीय प्रबंधक भारती ठाकरे ने बताया कि परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी बेहरई एवं वन अमला तथा उप निरीक्षक थाना बरघाट स्टाफ व स्थानीय ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंची। मृतका के शव का पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया है।

मृतका के उत्तराधिकारी को वन्यप्राणी द्वारा जनहानि क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत मुआवजा राशि आठ लाख रुपए प्रदान किया गया है। घटना की स्थिति को देखते हुए संभागीय प्रबंधक ने क्षेत्रीय ग्रामीणों को वनक्षेत्र में भ्रमण नहीं करने की समझाईश दी है। बताया कि घटना स्थल के आसपास वनक्षेत्रों में वन कर्मचारियों की गश्ती बढ़ा दी गई है।