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इस लग्न में करें दीवाली पूजन, महालक्ष्मी की होगी विशेष कृपा

साधना-उपासना का परम पवित्र पर्व

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Deepawali Puja Method 2018

Deepawali Puja Method 2018

शहडोल। कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है। यह महागणपति , महालक्ष्मी एवं महाकाली की पौराणिक अथवा तांत्रिक विधि से साधना-उपासना का परम पवित्र पर्व है। इस दिन उद्योग-धंधे के साथ-साथ नवीन कार्य करने एवं पुराने व्यापार में खाता पूजन का विशेष विधान है। ज्योतिर्विद विनोद शास्त्री के अनुसार अमावस्या तिथि 06 नवम्बर दिन मंगलवार को ही रात में 10 बजकर 06 मिनट से लग जा रही है जो 07 नवम्बर 2018 दिन बुधवार को रात में 09 बजकर 19 मिनट तक रहेगी, इस प्रकार उदया तिथि में अमावस्या का मान सूर्योदय से ही मिल रहा है।


उत्तम योग मिल रहा
ज्योतिर्विद विनोद शास्त्री कहते है कि धर्म शास्त्रों के अनुसार दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्व पूर्ण होता है । इसके अतिरिक्त इस दिन सूर्योदय से स्वाति नक्षत्र पूरा दिन व्याप्त रहेगी। साथ ही सूर्योदय से रात 07.24तक आयुष्मान योग तथा धूम्र योगा व्याप्त रहेगा। बुधवार के दिन दीपावली एवं अमावस्या का पूजन बाजार जगत के लिए उत्तम एवं शुभदायक होगा। साथ ही प्रदोष काल का भी बहुत ही उत्तम योग मिल रहा है। इस प्रकार प्रदोष काल में दीपावली पूजन का श्रेष्ठ विधान है तथा प्रदोष काल में ही दीप प्रज्वलित करना उत्तम फल दायक होता है।
ज्योतिर्विद् विनोद शास्त्री ने बताया कि दिन-रात के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहते है, जहां दिन विष्णु स्वरुप है वहीँ रात माता लक्ष्मी स्वरुपा हैं ,दोनों के संयोग काल को ही प्रदोष काल कहा जाता है।


महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है
दीपावली 'प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में विहित है, जिसमे प्रदोष काल का महत्त्व गृहस्थों एवं व्यापारियों हेतु महत्त्वपूर्ण होता है और महानिशीथ काल का तान्त्रिकों के लिए उपयुक्त होता है। इस वर्ष अमावस्या व्यापिनी महानिशिथ काल का आभाव है। वैसे महानिशीथ काल की पूजा स्थिर लग्न सिंह में मध्यरात्रि 12.09 से 2.23 बजे के मध्य की जा सकती है । इस प्रकार निशा पूजा काली पूजा तांत्रिक पूजा के लिए स्थिर सिंह में किया जाएगा जो अति महत्त्वपूर्ण,अति शुभ एवं कल्याणकारी मुहुत्र्त है। शेष रात्रि भोर में सूप बजाकर दरिद्र का निस्तारण एवं लक्ष्मी का प्रवेश कराया जाएगा।