
Higher options can be made for higher education
शहडोल- शहडोल के साथ ही अनूपपुर व उमरिया जिले में से कहीं भी एक भी अनुदान प्राप्त महाविद्यालय नहीं है। जबकि उच्च शिक्षा की रीढ़ मजबूत करने के लिये अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों की महती भूमिका हो सकती है। बेहतर शिक्षा के लिये अनुदान प्राप्त महाविद्यालय भी एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरकर सामने आते।
लेकिन इस ओर न तो प्रशासनिक प्रयास हुये और न ही जन प्रतिनिधियों ने ही दिलचस्पी ली। जबकि शहडोल को संभागीय मुख्यालय का दर्जा प्राप्त हुए एक दशक से भी अधिक का समय बीत चुका है। इस बीच पं. शंभूनाथ शुक्ल महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा मिल चुका है। जिसके लिये भवन भी बनकर तैयार हो रहा है। इस दिशा में भी पहल होती तो संभाग को अनुदान प्राप्त महाविद्यालय की सौगात भी मिल सकती थी। वर्ष 2014-15 में प्रदेश में कुल 75 अनुदान प्राप्त महाविद्यालय दर्ज है। जिनमें से शहडोल संभाग के किसी भी जिले में एक भी अनुदान प्राप्त महाविद्यालय दर्ज नही है। अकेले शहडोल जिले की बात की जाये तो यहां महज ९ शासकीय महाविद्यालय है। जिसमें सीट फुल होते ज्यादा देर नही लगती है।
सीट फुल होने के साथ ही कई छात्रों को इधर से उधर भटकना पड़ता है। शासकीय महाविद्यालयों में प्रवेश न मिलने की स्थिति में इन छात्रों के पास निजी कॉलेजों के चक्कर काटने के सिवा कोई रास्ता नही बचता है। जहां शिक्षा के नाम पर रकम वसूली जाती है। जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतनी पड़ती है।
व्यवस्थाओं का अभाव
जिले के 9 महाविद्यालयों में से कुछ महाविद्यालय हाल ही में संचालित हुए हैं ऐसे में यहां पाठ्यक्रम गिनती के ही प्रारंभ हो पाए हैं। इसके साथ ही सुविधाओं का भी अभाव है जिसके चलते छात्रों को बेहतर शिक्षा मुहैया नहीं हो पा रही है। ऐसे में यदि शासकीय महाविद्यालयों के अलावा अनुदान प्राप्त महाविद्यालय उपलब्ध होते तो छात्रों को निजी महाविद्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
Published on:
10 Nov 2017 02:31 pm

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