
बेरहम सिस्टम: खून से लथपथ पोते को लेकर आंखों में आंसू लिए भटकती रही महिला जनप्रतिनिधि
शहडोल. खून से लथपथ पोते के इलाज के लिए महिला जनप्रतिनिधि गिड़गिड़ाती रही। आंखों में आंसू लिए जपं अध्यक्ष इलाज के लिए इधर से उधर भटकती रही लेकिन मदद ही नहीं मिली। अस्पताल में मौजूद जिला चिकित्सालय का स्टॉफ तमाशबीन बना रहा। पोते को हाथ में लेकर वह कभी वार्ड ब्वाय के पास तो कभी स्टाफ नर्स के पास इलाज के लिए मिन्नतें करती रही लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। थक हारकर महिला जनप्रतिनिधि ने वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। पीडि़ता की शिकायत सुनते ही अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा खुद जिला चिकित्सालय पहुंच गए और मौके पर मौजूद स्टाफ को जमकर फटकार लगाई। अपर कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद मौजूद स्टॉफ हरकत में आया और बच्चे का इलाज मिला।
सिर पर गंभीर चोट, नहीं रुक रहा था खून
जानकारी के अनुसार जनपद अध्यक्ष सोहागपुर मीरा कोल के नाती रोहित के सिर में गंभीर चोट लगी थी। उसके सर से लगातार खून बह रहा था। जिसे लेकर मीरा बाई पहले तो सिंहपुर अस्पताल पहुंची। जहां इलाज न मिलने पर सुबह लगभग ८ बजे जिला चिकित्सालय पहुंची। जहां मुख्य द्वार पर वह पोते के इलाज के लिए स्टाफ नर्स और व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के सामने गिड़गिड़ाती रही लेकिन कोई भी उसके पोते के इलाज के लिए आगे नहीं आया। लगभग डेढ़ से दो घंटे तक जिला चिकित्सालय परिसर में ही खून से लथपथ पोते के इलाज के लिए भटकती रही।
बेटे की जगह पोता घायल
जनपद अध्यक्ष मीरा ने बताया कि गांव के ही रामदास कोल से उनका पुराना विवाद है। मंगलवार की सुबह उनके बेटा भतीजे रोहित को बाइक से घुमाने लेकर जा रहा था। इसी दौरान रामदास ने उसके बेटे पर डंडे से हमला कर दिया। जिस पर डंडा बेटे की जगह उनके पोते रोहित के सिर पर लग गया। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया था।
जनप्रतिनिधि की नहीं सुनते तो आमजन का क्या
जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को लेकर मीरा कोल ने गंभीर सवाल उठाए है। जपं अध्यक्ष मीरा कोल का कहना था कि जब क जनप्रतिनिधि की कोई सुनने वाला नहीं है तो आम नागरिकों की सुनवाई यहां कैसे होती होगी। मीरा बाई का कहना था कि डेढ़ घंटे तक पोते के इलाज के लिए भटकती रही लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। ऐसे में आमजन को तो इलाज ही नहीं मिल पाता होगा।
डेढ़ माह पहले पुलिस को बताया, नहीं की कार्रवाई, टाल-मटोल करती रही पुलिस
सिंहपुर थानान्तर्गत ग्राम केरहा निवासी मीरा कोल ने बताया कि रामदास कोल से उनका पुराना विवाद है। जिसे लेकर उसके द्वारा लगभग डेढ़ माह पूर्व गाली-गलौज कर अभद्रता की गई थी। जिसे लेकर उनके द्वारा सिंहपुर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिस पर पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। जिस पर उनके द्वारा कई बार फोन कर मामले में प्रकरण दर्ज करने और उचित कार्रवाई करने कहा गया। इसके बाद भी सिंहपुर पुलिस टाल-मटोल करती रही। इस बीच वह थाना भी गई और मामले में उचित कार्रवाई की मांग की। जिस पर पुलिस कर्मी द्वारा गांव पहुंच शिकायत दर्ज की गई लेकिन उस पर भी दोषी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। मीरा बाई का कहना था कि आए दिन आरोपी द्वारा विवाद की स्थिति निर्मित की जाती है किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद भी सिंहपुर पुलिस अनसुना करती रही और मंगलवार को यह हादसा हो गया। उन्होने सिंहपुर पुलिस की लापरवाही पर भी कई सवाल उठाए हैं।
अपर कलेक्टर ने लगाई फटकार, कहा- सुरक्षा गार्ड एवं वार्ड ब्वाय को हटाएं
घटना की जानकारी के बाद जिला चिकित्सालय पहुंचे अपर कलेक्टर अर्पित वर्मा ने चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टॉफ को निर्देशित किया कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही एवं उदासीनता बर्दाश्त नही की जाएगी। मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय उपचार एवं सुविधाएं प्रदान की जाए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पडें। चिकित्सक एवं चिकित्सकीय स्टाफ समय पर अस्पताल पहुंचे तथा जिला चिकित्सालय के प्रवेश द्वार पर गंभीर मरीज को तत्काल स्टे्रचर आदि उपलब्ध न कराने पर सुरक्षा गार्ड एवं वार्ड ब्वाय को नोटिस देकर हटाने के निर्देश देते हुए कहा कि मानवीय संवेदनाओं के साथ मरीजों को तत्काल चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराना चिकित्सकीय अमले की जिम्मेदारी है। अस्पताल में डयूटी डॉक्टरों का डिस्प्ले किया जाए जिससे आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इस दौरान जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ अंशुमन सोनारे, नोडल अधिकारी शहरी डॉ. पुनीत श्रीवास्तव सहित अन्य चिकित्सक एवं मेडिकल स्टाफ उपस्थित रहे।
Published on:
08 Feb 2022 08:56 pm
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