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लक्ष्य से कम खरीदी, 91 करोड़ रुपए का भुगतान अटका

सरकारी गोदाम और ओपन केप फुल होने की वजह से अब प्रशासन प्राइवेट मिलरों के गोदामों का सहारा ले रहा है। अकेले ब्योहारी में 6 निजी गोदामों का अधिग्रहण किया गया है, ताकि समितियों में खुले में पड़ी धान को सुरक्षित रखा जा सके। जिले में अभी भी लगभग 14,432 टन धान समितियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी है। बदलते मौसम और बारिश की आशंका ने प्रबंधकों की नींद उड़ा दी है। यदि धान लंबे समय तक खुले में रहती है, तो सूखने के कारण उसके वजन में कमी आती है। इस वजन की कमी की भरपाई समितियों को स्वयं करनी होगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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-37692 ने कराया था पंजीयन,1457 किसान नहीं पहुंचे धान बेंचने
-बारिश के डर से बढ़ी समितियों की चिंता

शहडोल। जिले में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी निर्धारित लक्ष्य के आंकड़े को नहीं छू पाई है। पंजीयन के बावजूद हजारों किसानों के उपज न बेचने और परिवहन की धीमी रतार के कारण अब करोड़ों का भुगतान अधर में लटक गया है।
समर्थन मूल्य पर धान बेचने के बाद अब जिले के हजारों किसान अपनी राशि का इंतजार कर रहे हैं। नियम के अनुसार, समितियों से धान का उठाव और गोदामों में रख-रखाव होने के बाद ही भुगतान प्रक्रिया पूरी होती है। वर्तमान में परिवहन की गति काफी धीमी है, जिसके कारण 91 करोड़ रुपए का भुगतान अटका हुआ है।

मिलरों के गोदाम अधिग्रहीत
सरकारी गोदाम और ओपन केप फुल होने की वजह से अब प्रशासन प्राइवेट मिलरों के गोदामों का सहारा ले रहा है। अकेले ब्योहारी में 6 निजी गोदामों का अधिग्रहण किया गया है, ताकि समितियों में खुले में पड़ी धान को सुरक्षित रखा जा सके। जिले में अभी भी लगभग 14,432 टन धान समितियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी है। बदलते मौसम और बारिश की आशंका ने प्रबंधकों की नींद उड़ा दी है। यदि धान लंबे समय तक खुले में रहती है, तो सूखने के कारण उसके वजन में कमी आती है। इस वजन की कमी की भरपाई समितियों को स्वयं करनी होगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्यों नहीं पूरा हुआ लक्ष्य?
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, लक्ष्य पूरा न होने का मुय कारण पंजीकृत किसानों का केंद्र तक न पहुंचना है। 37,692 पंजीकृत किसानों में से लगभग 5,138 किसानों ने अपनी उपज नहीं बेची। इनमें वे किसान भी शामिल हैं जिन्होंने स्लॉट तो बुक किया था, लेकिन अंतिम तिथि 20 जनवरी तक केंद्र पर नहीं पहुंचे।

प्रमुख आंकड़े एक नजऱ में:
कुल पंजीयन: 37,692 किसान
उपज बेचने वाले: 32,554 किसान (5,138 किसानों ने नहीं बेची धान)
कुल खरीदी: 2,17,705 टन (लक्ष्य 2.30 लाख टन)
कुल भुगतान देय: 515 करोड़ रुपए
अब तक भुगतान: 424 करोड़ रुपए
लंबित भुगतान: 91 करोड़ रुपए

इनका कहना है
जिन किसानों ने स्लॉट नहीं करा पाए थे उनकी जानकारी भोपाल भेजी गई है, यदि वहां से अनुमति मिलती है तो लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे। कुछ गोदाम खाली हैं और कुछ मिलरों के अधिग्रहीत कर रहे हैं। जल्द से जल्द धान परिवहन कर लिया जाएगा।
एमएस उपाध्याय, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम शहडोल