10 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नपा की वसूली फुल; सुविधाएं जीरो, बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो रहे यात्री

शो-पीस बना वॉटर फिल्टर: प्यास से हलाकान यात्री, व्यवस्थाओं के नाम पर अधिकारियों का निरीक्षण वाला छलावाशहडोल. बस स्टैंड प्रतिदिन 1000 से 1500 यात्रियों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां की बदहाली किसी त्रासदी से कम नहीं है। गर्मी के शुरुआती दौर में ही यहां यात्रियों को शुद्ध पेयजल की एक बूंद तक […]

2 min read
Google source verification


शो-पीस बना वॉटर फिल्टर: प्यास से हलाकान यात्री, व्यवस्थाओं के नाम पर अधिकारियों का निरीक्षण वाला छलावा
शहडोल. बस स्टैंड प्रतिदिन 1000 से 1500 यात्रियों की आवाजाही का प्रमुख केंद्र है, लेकिन यहां की बदहाली किसी त्रासदी से कम नहीं है। गर्मी के शुरुआती दौर में ही यहां यात्रियों को शुद्ध पेयजल की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रही है। नगरपालिका द्वारा लाखों का टैक्स और पार्किंग शुल्क वसूलने के बावजूद, यहां बनी पेयजल यूनिटें बरसों से जर्जर और गंदगी का शिकार हैं। वॉटर फिल्टर महज शो-पीस बनकर रह गए हैं। जिम्मेदारों के निरीक्षण सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं, जिसके चलते यात्री पानी की महंगी बोतलें खरीदने को मजबूर हैं। बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हो चुका यह बस स्टैंड, प्रशासनिक उदासीनता पोल खोलने के लिए काफी है। बीते दिनों यहां अधिकारियों ने निरीक्षण भी किया, लेकिन यात्रियों की परेशानी नजर नहीं आई।

ड्राइवर महासंघ का फिल्टर ही एकमात्र सहारा

नगर पालिका की पेयजल व्यवस्था तो कब की दम तोड़ चुकी है, वर्तमान में ड्राइवर महासंघ द्वारा लगाया गया एक छोटा सा वॉटर फिल्टर ही पूरे बस स्टैंड की प्यास बुझा रहा है। हालांकि, उसमें से भी पानी इतनी धीमी गति से गिर रहा है कि बोतल भरने के लिए यात्रियों परेशान होना पड़ता है। इसके आसपास भी गंदगी का अंबार है। सोमवार को भी यहां कई यात्री पानी के लिए परेशान होते दिखे।


सिस्टम की पोल खोलती जर्जर यूनिट

यात्रियों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए लगाई गई वाटर फिल्टर यूनिट अब महज एक दिखाव बनकर रह गई है। सालों पुरानी यह यूनिट पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। रख-रखाव के अभाव में पेयजल स्थल गंदगी का केन्द्र बन गया है, जहां पान-गुटखे की पीक ने पूरी दीवारों को लाल कर दिया है। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण के नाम पर फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

मैं आधे घंटे से पानी की तलाश में हूं। यहांँ जो सरकारी नल लगे हैं, उनमें धूल जमी है। मजबूरी में 20 रुपए की पानी की 25 रुपए में खरीदनी पड़ी। गरीब आदमी के लिए बहुत परेशानी है।
गणेश कुशवाहा, यात्री बरकछ

यहां से सफर करना मुश्किल हो गया है। बस स्टैंड पर गंदगी इतनी है कि प्याऊ के पास खड़े होने में भी घिन आती है। प्रशासन को कम से कम पीने के पानी की तो व्यवस्था करनी चाहिए।
भूपेन्द्र सिंह, यात्री उत्तरप्रदेश

नगरपालिका हर चीज का टैक्स लेती है, लेकिन पानी के लिए हमें पड़ोस के मोहल्लों या दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। गर्मी बढ़ रही है, अगर यही हाल रहा तो आगे चलकर यात्रियों को और भी परेशानी होगी।
सादिक खान, दुकानदार

आपके माध्यम से मुझे बस स्टैंड में पानी की समस्या की जानकारी मिली है, मैं कर्मचारियों से बात कर इसकी जानकारी लेती हूं, बस स्टैंंड में जो भी कमी होगी उसे पूरा करते हुए यात्रियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
आशा भंडारी,
सीएमओ नगरपालिका शहडोल