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शुभम बघेल@शहडोल. मां नर्मदा के उद्गम अमरकंटक में दुर्लभ जड़ी-बूटियोंं को संरक्षित करने के साथ अब उन पर शोध भी होगा। यहां शोध केन्द्र और 50 बिस्तर का चिकित्सा केन्द्र शुरू करने की तैयारी है। कमिश्नर शहडोल ने आयुष विभाग को प्रस्ताव भेजा था। जिसके बाद हरी झण्डी मिल गई है। अब अधिकारी अमरकंटक में भूमि की तलाश कर रहे हैं। जल्द ही यहां केन्द्र बनकर तैयार होगा। अमरकंटक में भारतीय चिकित्सा पद्धतियों का केन्द्र शुरू होने से देशभर से अमरकंटक में आने वाले पर्यटक भी जुड़ सकेंगे। दरअसल केन्द्र सरकार 50 करोड़ खर्च कर अमरकंटक के कायाकल्प में जोर दे रहा है। यहां कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों का अकूट भंडार है। औषधियों को बढ़ावा देने की दिशा में प्राकृतिक चिकित्सा और जैव विविधता का बड़ा सेंटर खोलने की तैयारी है। इसमें यहां के ग्रामीणों को भी जोड़ा जाएगा।
जल, मिट्टी व रंग चिकित्सा के साथ हर्बन गार्डन
आधुनिक चिकित्सा केन्द्र की स्थापना के लिए आयुष विभाग ने अनुमति दी है। इसमें आयुर्वेद सिद्ध, जनजातीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की सुविधा रहेगी। पंचकर्म, क्षारसूत्र, जल चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा के साथ रंग चिकित्सा, एनिमा, डी टाक्स सुविधाएं भी रहेंगी। इसके अलावा अमरकंटक में जड़ी-बूटियों पर शोध करते हुए रेकार्ड तैयार किया जाएगा। साथ ही हर्बल गार्डन भी बनाया जाएगा।
विंध्याचल, सतपुड़ा व मैकल पर्वतश्रेणियों की यही से शुरुआत
नर्मदा के उद्गम के साथ अमरकंटक में शीशम, सागौन और साल का घना जंगल है। जहां सूरज की किरणें भी नहीं पहुंचती हैं। अमरकंटक मैकल पर्वतश्रेणी की सबसे ऊंची श्रृंखला है। विंध्याचल, सतपुड़ा और मैकल पर्वतश्रेणियों की शुरुआत यही से होती है। अमरकंटक का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है। भारत भ्रमण करते समय शंकराचार्य ने कुछ दिन यहां गुजारे और कई मंदिरों की स्थापना की थी। कोटितीर्थ से कुछ दूरी पर कल्चुरि राजाओं के द्वारा बनाए गए मंदिर हैं। मंदिर कलात्मक ढंग से बनाए गए हैं। अमरकंटक साधु-संतों की आश्रय स्थली है। यह कई ऋषियों की तपोस्थली रही हैं, जिनमें भृगु, जमदग्नि आदि है। कबीर ने भी यहां कुछ समय बिताया था, कबीर चबूतरा भी है।
35 लाख से ज्यादा पर्यटक हर साल आते हैं अमरकंटक
अमरकंटक में हर साल 35 लाख से ज्यादा पर्यटक और तीर्थ यात्री आते हैं। यहां के गुलबकावली की देशभर में डिमांड है। अर्क से आंखों के इलाज के लिए बनने वाली औषधियों में उपयोग किया जाता है। इंदिरा गांधी नेशनल ट्राइबल यूनिवर्सिटी पूर्व में गुलबकावली पर शोध भी किया था। यहां होम स्टे की भी प्लानिंग तैयार की है। इसके लिए ग्रामीणों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। पर्यटकों को ग्रामीणों के यहां पर ठहराने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि संस्कृति और परंपरा से पर्यटक रूबरू भी हो सके। इसके लिए कमिश्नर की इको टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों से बात भी हुई है।
अमरकंटक में जड़ी-बूटियों को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। आयुष विभाग को प्रस्ताव भेजा था। अब अमरकंटक में शोध केन्द्र और 50 बिस्तर का अस्पताल खोलने की तैयारी है।
राजीव शर्मा, कमिश्नर शहडोल
Published on:
14 Jan 2022 08:48 pm
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