नपा के पास नहीं है कोई कार्य योजना, आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ रही संख्या
शहडोल. शहर में आवारा कुत्ते यानि स्ट्रीट डॉग एक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं। शहर में शायद ही ऐसा कोई मोहल्ला या फिर गली होगी, जहां पर आवारा कुत्तों का झुंड न हो। रात के समय यह काफी खतरनाक हो जाते हैं। बावजूद इसके नगर पालिका इन्हें नहीं पकड़ रहा है और शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से शहरवासी परेशान हैं। कुछ क्षेत्रों में इनका इतना आतंक है कि लोग रात के समय गली-मोहल्लों से निकलने में डर रहे हैं। नगर पालिका इनकी संख्या को नियंत्रित करने के लिए कोई कार्यक्रम नहीं चला रहा है, जिससे शहर में आवारा कुत्तों की तेजी से संख्या बढ़ रही है। पिछले कई वर्षों में शहर के ३९ वार्डों में आवारा कुत्तों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है, जिसकी मुख्य वजह नपा द्वारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण नहीं किया जाना बताया जा रहा है। नगर पालिका के पास शहर में आवारा कुुत्तों का कोई आंकड़ा भी नहीं है। इसके बावजूद यदि प्रति वार्ड में 100 से 150 कुत्तों का एवरेज निकाले तो शहर के ३९ वार्डों में चार हजार से छह हजार आवारा कुत्ते हो सकते हैं। जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं है और यह बढ़ते ही जा रहे है। इनकी संख्या रोकने के लिए नगर पालिका कोई व्यापक अभियान नहीं चला रहा है। रात के समय शहर के अधिकांश चौराहों, कॉलोनियों के चौराहों व गलियों में आवारा कुत्ते समूह बनाकर बैठे रहते हैं। इस दौरान सडक़ पर बाइक, साइकिल या पैदल निकलने वाले लोगों पर ये कभी भी हमला कर देते हैं। ऐसे में लोगों में डर बना रहता है। जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या ज्यादा है। वहां के रहवासी रात में बच्चों को भी अकेला नहीं खेलने देते। रात दस बजे के बाद आने वाले लोगों को इनका खतरा रहता है। वाहन आने पर यह अचानक ही हमला कर रहे हैं।
बिरियानी खाकर हो रहे हिंसक
नगर के प्रमुख चौराहों और गलियों में लगे बिरियानी और मुर्गा बिक्री के ठेलों में आवारा कुत्ते मंडराते रहते हैं। जो बचे अण्डा व मांस के टूकड़ों को खा-खाकर हिंसक हो रहे हैं। दुकानदार भी अण्डा व मांस के टुकड़ों को खुले में फेंक देते हंै।
गलियों में करते हैं गंदगी
पीडि़तों ने बताया है कि स्ट्रीट डॉग कहीं भी कभी भी की तर्ज पर शहर की गलियों में बीट कर देते है, जो लोगों के वाहनों केे पहियों व जूता चप्पलों के माध्यम से घर पहुंच रहा है। इनकी गंदगी को नपा के सफाई कर्मी भी साफ करने से कतराते हैं।
चल रहा कुत्तों के ब्रिडिंग का सीजन
पशु चिकित्सकों के मुताबिक अगस्त और सितम्बर माह में इनकी ब्रिडिंग का सीजन होता है। ऐसे में इन तीन माह में इनके पास से गुजरने पर इन्हें खतरे का आभास हो तो ये हमला कर देते हैं। साथ ही यह शहर में ग्रुप बनाकर घूमते हैं।
यह जानना अत्यन्त जरूरी
-कुत्ता चाहे आवारा हो या पालतू, यदि उसका टीकाकरण नहीं हुआ है, तो उसके काटने से रेबीज होने की आशंका बराबर बनी रहती है।
-पालतू कुत्ता सडक़ पर गंदगी न करें, यह तय करना उसके मालिक की जिम्मेदारी है और आवारा कुत्तों की गंदगी साफ करना नपा की जबाबदेही है।
इनका कहना है
अभी तक आवारा कुत्तों के खिलाफ नपा ने कोई अभियान नहीं चलाया है। वैसे नसबंदी के माध्यम से आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित किया जा सकता है, इसके लिए संबंधित एनजीओ से चर्चा कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मांस, अण्डा व बिरियानी सेन्टर के संचालकों द्वारा खुले में बची सामग्री फेंके जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मोतीलाल ङ्क्षसह, स्वच्छता निरीक्षक, नपा, शहडोल