
शहडोल. एक ओर जहां देशभर में बाघों की गणना का अभियान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सीमाओं पर पिछले महज 20 दिनों में चार बाघों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाघ गणना के बीच लगातार हो रही मौतें पार्क प्रबंधन की निगरानी, सतर्कता और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलती नजर आ रही हैं। इन चार मृत बाघों में तीन मादा बाघ शामिल हैं, जबकि एक बाघ के लिंग की अब तक पुष्टि नहीं हो सकी है। सभी घटनाएं टाइगर रिजर्व के बफर जोन और उससे लगे राजस्व क्षेत्रों में हुई हैं। पार्क प्रबंधन मौतों का कारण कहीं करंट, कहीं आपसी संघर्ष, तो कहीं शिकार का पीछा करते हुए हादसा बता रहा है, लेकिन घटनाओं की आवृत्ति ने लापरवाही की आशंका को बल दिया है। इन सिलसिलेवार घटनाओं ने बाघों की सुरक्षा व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार 7 जनवरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ताला वन परिक्षेत्र अंतर्गत बीट कथली (आरएफ-331) में एक मादा बाघ शावक मृत अवस्था में मिला। स्थल परीक्षण के बाद पार्क प्रबंधन ने मौत का कारण अन्य वन्यजीव से संघर्ष बताया और शव का दाह संस्कार कर दिया। रायपुर बीट अंतर्गत कुदरी टोला राजस्व क्षेत्र में 8 जनवरी को एक बाघ का शव कुएं में मिला। शव पूरी तरह क्षत-विक्षत था, जिसके अवशेष निकालने में दो दिन लगे। पार्क प्रबंधन के अनुसार, बाघ शिकार का पीछा करते हुए कुएं में गिर गया था। धमोखर बफर अंतर्गत बीट पिपरिया के कक्ष क्रमांक पीएफ-112 से लगभग 700 मीटर दूर 4-5 वर्षीय मादा बाघ का शव मिला। खेतों की सुरक्षा के लिए लगाई गई सोलर फेंसिंग में फैले करंट की चपेट में आने से बाघ की मौत हुई। इसके बाद मंगलवार को गुरुवाही राजस्व क्षेत्र (मानपुर बफर) में 5 वर्षीय मादा बाघ का शव मिला। बाघ की पीठ और गले पर दूसरे बाघ के नाखूनों के निशान पाए गए हैं। क्षेत्र में तीन बाघों की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। प्रारंभिक तौर पर मौत का कारण आपसी संघर्ष माना जा रहा है।
Published on:
21 Jan 2026 11:59 am
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