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मानव स्वास्थ्य पर रासायनिक कीटनाशक के प्रयोग से पड़ता है बुरा असर

किसान सम्मलेन एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का हुआ आयोजन

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मानव स्वास्थ्य पर रासायनिक कीटनाशक के प्रयोग से पड़ता है बुरा असर

मानव स्वास्थ्य पर रासायनिक कीटनाशक के प्रयोग से पड़ता है बुरा असर

शहडोल. कृषि विज्ञान केंद्र शहडोल एवं उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना अंतर्गत जिला स्तरीय युवा संवाद, किसान सम्मलेन एवं संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र में किया गया। केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मृगेंद्र सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा इस योजना का मकसद देश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की तरक्की के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना में सभी प्रकार के खाद्य सामग्री उदाहरण के तौर पर वनोपज पर आधारित निर्मित उत्पाद, चना-मुर्रा, भुजिया, पेठा, पापड़, आचार, बरी नमकीन, मिक्चर, बेकरी का निर्माण, राईस मिल, कोदो मिल, पोहा मिल, आटा चक्की, मसाला उद्योग इत्यादि को योजना के तहत लाभ प्रदान किया जाएगा। तकनीकी सत्र के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. बृजकिशोर प्रजापति ने जानकारी दी कि फसलों को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए सामान्यता किसान रसायनिक कीटनाशक का प्रयोग करते हैं। जिसकी वजह से पर्यावरण प्रदूषण के साथ कीटों में सहनशीलता उत्पन्न हो जाती है और किसान को कीट नियंत्रण के लिए अधिक डोज देनी पड़ती है। इसका खर्चा भी अधिक और मानव स्वास्थ पर भी बुरा असर होता है। रसायनों का अधिक तथा अनुचित मात्रा में उपयोग से मिट्टी भी धीरे-धीरे बंजर भी होने लगती है। इन्ही परिणामों को देखते हुए समन्वित कीट प्रबंधन तकनीकों को अपनाया जाना बहुत जरूरी है।
लाइट ट्रैप के उपयोग से शत्रु कीट होते हैं नष्ट
कीट नियंत्रण में रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी हो सके इसके लिए लाइट ट्रैप महत्वपूर्ण यांत्रिकी विधि है जिसमें खर्चा कम एवं लाभ अधिक होता है। खेतों में लाइट ट्रेप को फसल की ऊंचाई से 2 फीट ऊपर लगाना चाहिए। इसे शाम को 7 बजे से 10 बजे तक रात में प्रकाश चालू करना चाहिए। जिससे आस-पास के कीट इससे आकर्षित होकर इस प्रपंच में फस जाए। एक हेक्टेयर खेत के लिए एक लाइट ट्रैप की आवश्यकता पड़ती है। इसे खेत में बीचों-बीच लगाना चाहिए। आजकल सोलर लाइट ट्रैप उपकरण भी आ गया है। फसलों, सब्जियों या फलों की फसल में इस लाइट ट्रैप का उपयोग कर मास ट्रेपिंग यानि बड़ी मात्रा में कीटों को पकड़ा जा सकता है। ऐसा करने से कीटों की संख्या में भारी कमी आ जाती है। लाइट ट्रैप का उपयोग करने से सिर्फ शत्रु कीट ही नष्ट होते है और मित्र कीट नीचे के छेद से निकल जाते है यह ट्रैप धान, दलहनी, मक्का, सोयाबीन, टमाटर, बैगन आदि सभी फसलों में आक्रमण करने वाले पत्ती मोडक, तना छेदक, कट वर्म, सभी प्रकार की सूँडी, फल छेदक, पत्ती सुरंगक कीट आदि को वयस्क अवस्था में ही फंसा लेता है।
कीटों को करता है आकर्षित
डॉ. प्रजापति ने कृषकों को बताया कि स्टिकी ट्रैप के इस्तेमाल से फसलों को कीटों से होने वाले नुकसान में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। स्टिकी ट्रैप कई तरह की रंगीन शीट होती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खेत में लगाई जाती है। हर कीट किसी विशेष रंग की ओर आकर्षित होता है। अब अगर उसी रंग की शीट पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाकर फसल की ऊंचाई से करीब एक फीट और ऊंचे पर टांग दिया जाए तो कीट रंग से आकर्षित होकर इस शीट पर चिपक जाता है और फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। ग्रामीण उद्यानिकी विस्तार अधिकारीनोरिम ने कार्यक्रम का उद्देश्य एवं इसकी महत्ता के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में ग्रामीण उद्यानिकी विस्तार अधिकारी विक्रम कलमे, मोहवती, शिखा शुक्ला एवं अजय का विशेष योगदान रहा।

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