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यहां वेद और शास्त्र में पारंगत हो रहे आदिवासी-बैगा बच्चे

गांव में हर दिन कुटिया में लगती है चालीस बच्चों की वैदिक क्लास

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Shahdol online

Nov 16, 2016

veda

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शुभम सिंह बघेल @ शहडोल। आध्यात्म और संस्कृति की राह से युवाओं का जहां भटकाव हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गांव के बीच में ब्राम्हण युवा वेद और शास्त्रों की क्लास लगा रहे हैं। कुटिया में भगवान शिव की मंदिर की बीच आदिवासी बैगा मासूम और गांव के बच्चों को वेद और शास्त्रों को शिक्षा दी जा रही है। आध्यात्म के प्रति बदलते विचार और अंधविश्वास को मिटाकर लौकिक, वैदिक और पौराणिक पद्वति से परिचय कराने की दिशा में सिंहपुर के युवा भगवताचार्य सूर्यकांत महाराज कुटिया में क्लास लगा रहे हैं।

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दिया जा रहा संस्कृति, सनातन वैदिक धर्म का ज्ञान

आदिवासी बस्ती के बीच में हर दिन वेद और शास्त्रों की क्लास लगती है। बिना जात पात और भेदभाव के हर बच्चों को वैदिक शिक्षा दी जा रही है। यह सिलसिला एक दो महीने नहीं, बल्कि पिछले तीन सालों से चल रहा है। इतना ही नहीं, कुटिया में धर्म और आध्यात्म पर लगने वाली इस क्लास में कई आदिवासी मासूम भी हैं। जिन्हे संस्कृति, सनातन वैदिक धर्म का ज्ञान दिया जाता है। भगवताचार्य सूर्यकांत अब तक 35 से अधिक जगहों पर भागवत कथा करा चुके हैं। अधिकांश भागवत कथा में इन मासूमों को भी भेजा जाता है। भगवताचार्य सूर्यकांत ने बताया कि सिंहपुर में तैयार हो रही इस कुटिया में लगभग 40 से अधिक बच्चों को वेद और शास्त्रों को शिक्षा दीक्षा दी जा रही है। इसमें अधिकांश मासूम आदिवासी समाज से होने के साथ ही 18 साल से कम आयु के हैं। उन्होने बताया कि कुटिया में स्वदेशी तरीके से हवन सामग्री भी इन्ही मासूमों द्वारा तैयार किया जाता है, जिसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों पर लोगों को नि: शुल्क बांटा जाता है।

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12 साल की शिष्या करा रही भागवतकथा

भगवताचार्य सूर्यकांत ने बताया कि गांव की प्रांसी पांडेय को पिछले काफी समय से धर्म, वेद और शास्त्रों की शिक्षा दीक्षा दी जा रही थी। स्थिति यह है कि अब 12 साल की आयु में ही प्रांसी भागवत कथा करा रही हैं। हाल ही में प्रांसी ने अनूपपुर जिले में भागवतकथा कराया था। इसके साथ कुटिया के कई ऐेसे मासूम हंै, जो काफी हद तक वेद शास्त्रों के जानकार हो गए हैं। भगवताचार्य सूर्यकांत ने बताया कि कुटिया के संचालन के लिए किसी से आर्थिक सहयोग नहीं लिया जाता है। पूर्व में कई चुनौतियां आई थी, लेकिन हार नहीं मानी और अब ग्रामीण जागरूक होकर बच्चों को भेज रहे हैं।

आध्यात्म से बदलेगी युवाओं की सोच

भगवताचार्य सूर्यकांत का कहना है कि आज की युवा पीढी का धर्म से भटकाव हो रहा है। धर्म के प्रति युवा पीढ़ी ज्यादा गंभीर नहीं है। आध्यात्म न होने की वजह से विषम परिस्थितियों में युवाओं का विचार बदल रहा है। इसके लिए आध्यात्म से जुडाव बेहद जरूरी है। गांव में मासूम और आदिवासी बच्चों को धर्म से जोडऩे की दिशा में यह पहल की गई है। कुटिया में 40 से अधिक बच्चे हैं। जिन्हे वेद और शास्त्रों की शिक्षा दी जा रही है। एक 12 वर्षीय शिष्या द्वारा अब कई जगहों पर भागवत कथा कराई जा रही है।

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