आदिवासी बस्ती के बीच में हर दिन वेद और शास्त्रों की क्लास लगती है। बिना जात पात और भेदभाव के हर बच्चों को वैदिक शिक्षा दी जा रही है। यह सिलसिला एक दो महीने नहीं, बल्कि पिछले तीन सालों से चल रहा है। इतना ही नहीं, कुटिया में धर्म और आध्यात्म पर लगने वाली इस क्लास में कई आदिवासी मासूम भी हैं। जिन्हे संस्कृति, सनातन वैदिक धर्म का ज्ञान दिया जाता है। भगवताचार्य सूर्यकांत अब तक 35 से अधिक जगहों पर भागवत कथा करा चुके हैं। अधिकांश भागवत कथा में इन मासूमों को भी भेजा जाता है। भगवताचार्य सूर्यकांत ने बताया कि सिंहपुर में तैयार हो रही इस कुटिया में लगभग 40 से अधिक बच्चों को वेद और शास्त्रों को शिक्षा दीक्षा दी जा रही है। इसमें अधिकांश मासूम आदिवासी समाज से होने के साथ ही 18 साल से कम आयु के हैं। उन्होने बताया कि कुटिया में स्वदेशी तरीके से हवन सामग्री भी इन्ही मासूमों द्वारा तैयार किया जाता है, जिसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों पर लोगों को नि: शुल्क बांटा जाता है।