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आखिर क्यों किसान आंदोलन करने को हैं मजबूर ?

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Why the farmers are forced to do the agitation?

Why the farmers are forced to do the agitation?

शहडोल /बुढ़ार- अब एक बार फिर से किसान आंदोलन की करने की तैयारी में हैं। सरकार के द्वारा की गई उपेक्षा के खिलाफ अब जिले के किसानों का सब्र टूटता दिखाई दे रहा है इसी कड़ी मे मंगलवार को जिले के बुढ़ार और सोहागपुर के दर्जनों किसानों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। और मांग की है कि अगर अगामी 15 नवंबर तक किसानों के हित में फैसला नही दिया गया तो बुढ़ार और सोहागपुर के किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होंगे। दरअसल इस वर्ष भी जिले के किसानों की फसल को ग्रहण लग गया है। अल्पवर्षा और कीट व्याधि से किसानों की फसल बर्बाद हो गई है।

और अब अपने फसल को लेकर किसानों को चिंता सता रही है। ज्ञापन में आरोपित किया है कि जिले के दो तहसीलों को सूखा ग्रस्त घोषित नहीं करने के कारण यहां के किसानो के सामने समस्या पैदा हो गई है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे सोहागपुर और बुढ़ार के दर्जनों किसानों ने प्रशासन और प्रदेश सरकार पर सौतेला व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा है कि जहां पूरे संभाग को सूखा घोषित कर दिया गया है। जबकि बुढ़ार एवं सोहागपुर तहसील में भी सूखा से किसान बेहाल है । ऐसे में प्रदेश की सरकार किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है।
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लापरवाह परियोजना प्रशासक सहित चार को थमाया नोटिस
शहडोल- संभाग के चार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और विभागीय जांच मामले में कमिश्नर बीएम शर्मा ने १० दिनों के भीतर अधिकारियों से अपना पक्ष रखने के लिए कहा है जारी आदेश में कमिश्नर ने उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विभाग अनूपपुर एनडी गुप्ता, सहायक यंत्री जल संसाधन देवलोंद, सहायक परियोजना प्रशासक आदिवासी विकास प्रयास कुमार प्रकाश, उपयंत्री लोक निर्माण विभाग उमरिया अशोक कुमार श्रीवास्तव को उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा के अधीन प्रस्तावित कार्यवाही में पक्ष प्रस्तुत करने के लिए 10 दिवस का अवसर प्रदान करते जवाब देने को कहा है।