
जीवन को धार्मिक बनाने का संदेश देती है दस धर्मों की आराधना
सामूहिक अभिषेक शांतिधारा करके दसलक्षण संबंधित पूजन विधान का हुआ आयोजन
शहडोल. जैन धर्म का शाश्वत दसलक्षण पर्व आज से प्रारंभ हो गया है। जिसके प्रथम दिवस बुधवार को 1008 श्री पाŸवनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विविध धार्मिक पूजा विधान का आयोजन किया गया। पूरी समाज ने सामूहिक अभिषेक शांतिधारा करके दसलक्षण धर्म से संबंधित पूजन विधान का आयोजन किया। यह धार्मिक आयोजन आगामी दस दिनों तक नित्य आयोजित होंगे। इसके साथ ही दसलक्षण पर्व पर विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएगी।
10 लक्षण धर्म के प्रथम दिवस अर्थात उत्तम क्षमा धर्म परंपराओं के अनुसार आज के दिन उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन पूजा आदि कार्यक्रम होते हैं। आचार्य गुरुवर 108 श्री विद्यासागर महाराज की परंपरा में सुबह से तत्वार्थ सूत्र के 1 अध्याय का अर्थ का स्वाध्याय होता है। उसी परंपरा का निर्वाह शहडोल में हुआ और प्रथम दिवस प्रथम अध्याय का वाचन हुआ। मुनिश्री सुव्रत सागर महाराज ने पूरी समाज को प्रेरित करते हुए कहा कि समाज को सिर्फ एक दिशा निर्देशन देना है तदुपरांत पूरी समाज का धार्मिक वातावरण निर्मित हो जाता है। उन्होने कहा कि सुख सुविधाओं का त्याग करके भगवान की भक्ति में अगर कोई व्यक्ति रमण करेगा तो निश्चित रूप से संत महाराज उनकी प्रशंसा करें बिना कैसे रुक सकते हैं। मुनिश्री ने उत्तम क्षमा धर्म के विषय में समझाते हुए बताया की हम अपने जीवन में क्रोध को इतना ज्यादा महत्व दे देते हैं, क्षमा का हमारे हृदय में कोई स्थान बचता ही नहीं है। अगर हमें अपने जीवन में सब कुछ क्रोध से ही मिल जाता क्षमा की आवश्यकता पड़ती ही ना किंतु क्रोध ने आज तक प्रतिशोध के अलावा कुछ भी नहीं दिया है। जो आत्मा का शोध करना चाहते हैं व्यक्ति क्रोध से नहीं किंतु क्षमा से अपनी आत्मा के कल्याण का पथ का चयन करते हैं।
शाश्वत पर्व कहलाता है दसलक्षण पर्व
मुनिश्री सुव्रत सागर महराज ने पत्रिका से चर्चा के दौरान बताया कि दसलक्षण पर्व शाश्वत पर्व कहलाता है। यह वर्ष में तीन बार आता है। बरसात में अपने कार्यों से समय निकालकर इसे बड़े धूम-धाम से मनाते हैं। इस दसलक्षण पर्व में दस धर्मो की आराधनाएं होती है। दस धर्म की आराधनाएं हमारे जीवन को धार्मिक बनाने का संदेश देती है। हमे अपने सांसारिक जीवन को जीने में मदद करती है। इन दस धर्मों की आराधना की आवश्यकता सारे विश्व को है। जिस व्यक्ति ने धर्म के दस लक्षणें के अनुसार जीवन जीना सीख लिया है वह कभी परेशान नहीं होता है। विश्व में जो हिंसा का तांडव है उससे विश्व को बचाना है तो दस धर्म की आराधना करने से सबको जोडऩा होगा।
यह होंगे कार्यक्रम
दसलक्षण पर्व पर जैन मंदिर में विविध कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी। जिसमें बुधवार को आरती प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसके बाद 1 सितम्बर को धार्मिक वेस-भूषा, 2 सितम्बर को जैन तम्बोला, 3 सितम्बर को जोड़ी कमाल की कार्यक्रम, 4 सितम्बर को जैन अंताक्षरी, 5 सितम्बर को चलो तीर्थ वंदना करें, 6 सितम्बर को 1 मिनट तोल मोल के बोल, 7 सितम्बर को जैन क्रिकेट, 8 सितम्बर को नाट्य प्रस्तुति व 9 सितम्बर को क्षमावाणी का आयोजन होगा।
Published on:
31 Aug 2022 09:42 pm

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