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शराब के सेवन से मनुष्य के शरीर और बुद्धि के साथ आत्मा का भी हो जाता है नाश

पत्रिका अभियान....नशामुक्त हो मध्यप्रदेश, गव्यसिद्ध अरविंद शुक्ल ने बताए २१ दिन नशा छोडऩे व व्ययसनमुक्त होने के तरीके

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Consumption of alcohol destroys human body and intellect as well as so

Consumption of alcohol destroys human body and intellect as well as so

सीधी। कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ देश जंग लड़ रहा है। जिस तरह देशवासी मिलकर यह जंग लड़ रहे हैं, उससे यह निश्चित है कोरोनो हारेगा और देश जीतेगा। ऐसे में यदि हम संकल्प लें तो एक और जंग जीत सकते हैं नशा से। लॉकडाउन के कारण व्यसन और नशे में फंसे लोगों के लिए यह एक अच्छा अवसर है। सरकारों ने शराब, भांग, गांजा, तंबाकू-पान, गुटखा-सिंगरेट की दुकानें बंद कर दी हैं। ऐसे में बस एक संकल्प लें और व्यसन के संक्रमण को सदा के लिए आइसोलेशन में भेंज दें।
पंचगव्य एवं स्वास्थ्य विशेषज्ञ शुक्ला पैथालॉजी सीधी के संचालक अरविंद शुक्ला बताते हैं कि नशे का प्रचलन केवल आधुनिक समाज की देन नहीं है, अपितु प्राचीनकाल में भी इसका सेवन होता था। नशे के पक्षधर लोग रामायण और महाभारत काल के अनेक उदाहरण देते हैं। वहीं इसके विरोधियों का मानना है कि प्राचीन काल में मदिरा का सेवन आसुरी प्रवृत्ति के लोग ही करते थे और इससे समाज में उस समय भी असुरक्षा, भय और घृणा का वातावरण उत्पन्न होता था। ऐसी आसुरी प्रवृत्ति के लोग मदिरा का सेवन करने के बाद खुले आम बुरे कार्यों को अंजाम देते थे। हमारे समाज में नशे को सदा बुराइयों का प्रतीक माना और स्वीकार किया गया है। इनमें सर्वाधिक प्रचलन शराब का है। शराब सभी प्रकार की बुराइयों की जड़ है। शराब के सेवन से मानव के विवेक के साथ सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। वह अपने हित-अहित और भले-बुरे का अंतर नहीं समझ पाता। शराब के सेवन से मनुष्य के शरीर और बुद्धि के साथ-साथ आत्मा का भी नाश हो जाता है। शराबी अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। अमीर से गरीब और बच्चे से बुजुर्ग तक इस लत के शिकार हो रहे हैं। शराब के अतिरिक्त गुटका, तंबाकू गांजा, अफ ीम और अन्य अनेक प्रकार के नशे अत्यधिक मात्रा में प्रचलित हो रहे हैं।
लॉकडाउन के 21 दिन कारगर है नशा मुक्ति के लिए-
जो लोग कहते हैं हम व्यसन छोडऩा चाहते हैं छूटता नहीं है, उनके लिए लॉक डाउन के यह 21 दिन नशा मुक्ति के लिए बहुत ही कारगर साबित हो सकते हैं। क्योंकि आपकी अच्छी और बुरी आदत बनने के लिए 21 दिन पर्याप्त है ऐसा मनोवैज्ञानिक मानते हैं। मुझे डॉ.विश्वरूप राय चौधरी द्वारा सुनाया गया एक सत्य कथानक याद आता है, उन्होंने बताया कि एक बार नासा के वैज्ञानिकों ने कुछ लोगों पर एक परीक्षण किया, उसमें कुछ लोगों को 21 दिन के लिए अंतरिक्ष में उल्टा करके छोड़ दिया गया और पाया गया कि उनके शुरुआती दिनों में कुछ परेशानियां एवं तकलीफंे बढ़ी, परंतु धीरे-धीरे उन लोगों को उल्टा देखने की आदत पड़ गई और 21 दिनों में उनको यह अवस्था सहज लगने लगी एवं सब कुछ सहज दिखाई देने लगा। इन लोगों को वापस अपनी अवस्था में सहज रूप में लाने के लिए फि र 21 दिन ही लगे। इस प्रयोग से उन्होंने यह सिद्ध किया कि किसी भी आदत को बनने के लिए या बिगडऩे के लिए 21 दिन पर्याप्त हैं।
ऐसे भी छोड़ी जा सकती है नशे की लत-
अरविंद शुक्ला ने बताया कि जो लोग नशा छोडऩा चाहते हैं परंतु कहते हैं छूटता नहीं है। उनके लिए बहुत ही सरल उपाय हैं जो वह यह 21 दिन तक लगातार कर सकते हैं। पहला उपाय है संकल्प शक्ति और मन को मजबूत बनाने के लिए सुखासन में बैठकर अलोम-विलोम प्राणायाम करें। दूसरा तरीका है अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े कर लें उसमें काला नमक मिला लें एवं नींबू का रस मिला लें और धूप में रख दें, सूखने के बाद इसे एक कांच की बरनी में भरकर रख लें एवं आवश्यकता अनुसार एक पुडिय़ा में रोजाना के लिए रखें जब शराब तंबाकू गुटके की तलब लगे तो उस अदरक को चूसना है ऐसा लगातार 21 दिन किया तो भी यह नशे की आदत छूट जाएगी। विज्ञान की रिसर्च कहती है कि कोई भी व्यक्ति नशे का आदि जब होता है जब उसके शरीर के अंदर सल्फर की मात्रा में बहुत अधिक कमी आ जाती है, अदरक में पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक रूप से सल्फ र होता है।