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4 साल में 40 हजार से ज्यादा लोगों ने सड़क हादसे में गंवाई जान, सामने आई यह बड़ी वजह

Driving Schools in Rajasthan : प्रदेश में एक भी जगह बेहतर ड्राइविंग स्कूल तक नहीं है। इसका नतीजा है कि वाहनों से होने वाले हादसे बढ़ते जा रहे हैं।

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Driving Schools in Rajasthan : प्रदेश में एक भी जगह बेहतर ड्राइविंग स्कूल तक नहीं है। इसका नतीजा है कि वाहनों से होने वाले हादसे बढ़ते जा रहे हैं।

4 साल में 40 हजार लोगों ने सडक़ हादसे में गंवाई अपनी जान, सामने आई यह बड़ी वजह

पूरण सिंह शेखावात, सीकर.

driving schools in Rajasthan : भारी वाहनों से होने वाले हादसों की रोकथाम के लिए वाहन चालकों के प्रशिक्षण देने के लिए पिछली सरकार ने जोर-शोर से प्रदेश के सभी जिलों में मोटर ड्राइविंग स्कूल ( Motor Driving Training School ) और स्किल डवलपमेंट सेंटर खोलने के दावे किए थे लेकिन ये सभी दावे कागजों में दफन हो गए हैं। इसका नतीजा है कि प्रदेश में एक भी जगह बेहतर ड्राइविंग स्कूल तक नहीं है।

इसका नतीजा है कि वाहनों से होने वाले हादसे बढ़ते ( Increase road accident in Rajasthan ) जा रहे हैं। इधर परिवहन विभाग ( Transport Department Rajasthan ) बजट नहीं होने का हवाला देकर मामले से पल्ला झाड रहा है। हालांकि अजमेर और रेलमगरा में पीपीपी मोड पर ड्राइविंग प्रशिक्षण कौशल शिविर चल रहे हैं। गौरतलब है कि हर साल प्रदेश में सडक़ सुरक्षा के लिए 90 करोड़ का बजट दिया जा रहा है।

दो जगह चिन्हित
सीकर जिला मुख्यालय पर चालकों को बेहतर प्रशिक्षण मिले इसके लिए परिवहन विभाग ने चार वर्ष पहले चंदपुरा और गोकुलपुरा जोहड़ के पास जगह चिन्हित की थी। दोनो जगह के लिए विभाग ने सर्वे भी करवा लिया। सर्वे की फाइल बना कर प्रस्ताव मुख्यालय भेजा तो मुख्यालय ने बजट की कमी का हवाला देते हुए फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

तालमेल का अभाव
Motor Driving Schools in Sikar : सीकर में ड्राइविंग स्कूल खोलने के लिए फाइल भी बनी थी। लेकिन यूआईटी की ओर से विभाग को रियायती दर पर जमीन नहीं देने के कारण मामला अटक गया। इस कारण मोटर ड्राइविंग स्कूल नहीं खुल पाए। इस कारण हालात खराब हो गए और लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान उठ गए हैं। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों की माने तो बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिलने का नतीजा है कि भारी वाहनों पर चलने वाले करीब 38 प्रतिशत चालक व परिचालक पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं हो पाते हैं। कमोबेश यही स्थिति विभाग के ऑटोमेटेड ड्राइविंग ट्रेक की है।

फैक्ट फाइल
वर्ष दुर्घटना मौत
2015 24072 10510
2016 23066 10465
2017 22112 10444
2018 14798 10300