
सीकर. प्रदेश की अधिकांश कृषि उपज मंडियों में किसानों को ताज़ा भाव की जानकारी देने के लिए लगाए गए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड अब शोपीस बनकर रह गए हैं। ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) योजना के तहत सभी प्रमुख मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक बोर्ड लगाए गए थे, जिससे किसान अपनी उपज बेचने से पहले अलग-अलग मंडियों के भाव देख सकें, लेकिन हकीकत में अधिकतर बोर्ड बंद पड़े हैं या पुराने रेट दिखा रहे हैं।किसानों को रियल टाइम भाव उपलब्ध मंडी निदेशालय ने ई-नाम योजना के तहत प्रदेश की लगभग 100 से अधिक मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लगाए थे। जिनका उद्देश्य था किसानों को रियल टाइम भाव उपलब्ध कराना। हालात यह है कि सीकर सहित प्रदेश में करीब 60–70 प्रतिशत मंडियों में बोर्ड खराब या बंद पड़े हैं। वहीं कई जगहों पर पिछले 2–3 दिन पुराने भाव ही प्रदर्शित हो रहे हैं।गौरतलब है कि मंडी निदेशालय ने लाखों रुपये खर्च कर मंडियों में डिजिटल बोर्ड तो लगवा दिए, लेकिन उनके संचालन और निगरानी की ठोस व्यवस्था नहीं होने से ये बोर्ड अब किसानों के लिए महज शोपीस बनकर रह गए हैं।
अर्थव्यवस्था का आधार होने के बावजूद सीकर में किसानों की अनदेखी हो रही है। मंडी भाव की सही जानकारी नहीं मिलने से किसान मजबूरी में आढ़तियों की ओर से बताए गए दामों पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ती है। किसानों का कहना है कि फसल कटाई के समय उन्हें दूसरे जिलों की मंडियों के रेट पता चल जाएं, तो वे बेहतर दाम वाली मंडी का चुनाव कर सकते हैं। लेकिन डिस्प्ले बोर्ड बंद होने से योजना का लाभ सीमित होकर रह गया है।
मंडी समितियों की ओर से डिस्प्ले बोर्ड के रख-रखाव नहीं किया जा रहा है। बारिश और धूप में भीगने के कारण डिस्पले बोर्ड की समय पर मरम्मत और अपडेट नहीं किया जा रहा है। कई मंडियों में इंटरनेट कनेक्शन और ऑपरेटर की कमी भी बड़ी वजह बताई जा रही है। जिससे मंडी व्यापार में पारदर्शिता कम हुई है। इनका कहना है मंडी समिति में ईनाम योजना के तहत डिजीटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए गए थे। मौसम की मार से इनके खराब होने को लेकर उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। मरम्मत का काम मुख्यालय स्तर से किया जाएगा।
सुमन चौधरी, मंडी सचिव सीकर
Published on:
02 Feb 2026 11:47 am

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