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सरकार ने किए कान बन्द, चिकित्सक बने बेरहम,कोसती रहीं नम आंखें, 4 दिन में 125 ऑपरेशन टले

पिछले चार दिन में एसके अस्पताल और जनाना अस्पताल में एक भी ऑपरेशन नहीं हो सका।

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सीकर. सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल का असर जिला मुख्यालय से ग्रामीण क्षेत्र तक बढ़ता जा रहा है। मरीज और परिजन नम आंखों से अपनी बेबसी और निजी अस्पतालों की मनमानी को कोसते रहे। पिछले चार दिन में एसके अस्पताल और जनाना अस्पताल में एक भी ऑपरेशन नहीं हो सका।

4 दिन बाद भी सेवारत चिकित्सकों के अडिय़ल रवैये से प्रदेश की सरकार की सेहत पर कुछ फर्क नहीं पड़ रहा है। आयुष, आयुर्वेदिक और होम्योपैथ चिकित्सक और नर्सिंगकर्मियों के सहारे चिकित्सा सेवा बहाल रखने का दावा करने वाली राज्य सरकार चैन में है। सरकारी चिकित्सालयों पर भरोसा करने वाले लोगों का विश्वास भी डोल रहा है। चिकित्सालय में मौत से लड़ रहे मरीजों को देख परिजनों के दिल से चिकित्सक व राज्य सरकार के लिए आह निकल रही है। फैली अव्यवस्था के इस आलम में इनकी नम आंखें को पौछने वाला तक नहीं है।

बिना दवा कैसे हो इलाज
हड़ताल के कारण चिकित्सालयों में आयुर्वेदिक दवा की कमी हो गई। आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने बताया कि अब उनके पास कुछ मात्रा में 20 प्रकार की ही दवाएं हैं। दवा नहीं होने के कारण कई रोगियों को बाजार से दवा खरीदनी पड़ी। 40 प्रतिशत के करीब ओपीडी रही।

रोगी नहीं भर्ती
एसके अस्पताल में पिछले चार दिन में एक भी मरीज का ऑपरेशन नहीं हो सका है। मेडिकल सर्जीकल और आर्थोपेडिक वार्ड में रोगियों की भरमार रहती है लेकिन हड़ताल के कारण अब इन वार्डों में रोगी ही नहीं है। रोगी अस्पताल में नहीं रहे हैं। जो पूर्व से भर्ती हैं उन्हें रैफर या डिस्चार्ज कर दिया गया।

हुए चार पोस्टमार्टम
एसके अस्पताल में मंगलवार को डॉ. दीपिका ने सडक़ दुर्घटना सहित हादसे में आए चार शवों के पोस्टमार्टम किए।


डाक्टर बोले...
किस मुंह से वार्ता करे सरकार, सरकार ने खो दिया विश्वास
सेवारत चिकित्सकों और सरकार के बीच विवादों की खाई गहरी होती जा रही है। दोनों पक्षों की ओर से पहल नहीं होने के कारण मरीजों की फजीहत हो रही है। सरकार और चिकित्सक संघ के बीच हुए समझौते की वादा खिलाफी करने पर चिकित्सक संघ अपनी मांगों को पूरा करने पर अड़ा हुआ है। दूसरी ओर सरकार की ओर से इस गतिरोध को दूर करने के लिए कवायद नहीं हो रही है।


डाक्टरों से सरकार ने किया धोखा
सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश नेतृत्व से मिले निर्देशों के अनुसार समझौते का क्रियान्वयन नहीं होने तक आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। काठ की हांडी एक बार ही चढ़ सकती है। प्राइवेट डाक्टर व सीएमएचओ, पीएमओ भी अवकाश पर जाने का मानस बना रहे हैं।

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