
फोटो: पत्रिका
Father-Daughter Emotional Story: ये कहानी है एक पिता के बेटी को पढ़ाने के जुनून और समपर्ण की। बेटी का सपना बेहतर इंजीनियर बनकर देश की तरक्की में अपना योगदान देने का, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती पढ़ाई की थी। बेटी ने जब पिता को बताया कि सीकर जिले में इंजीनियरिंग और मेडिकल की बेहतर तैयार होती है तो पिता ने अपने कॅरियर को ताक पर रख दिया है। इसके बाद बेटी के कॅरियर के सपनों में रंग भरने के लिए खुद के कॅरियर के दस साल पुराने अनुभव को भी पलभर में भूल गए।
ये संघर्षभरी कहानी है कोलकात्ता निवासी सुशांता शाह की। शाह कोलकाता के नामी पेटिंग कलाकार रह चुके है। वह कोलकाता में 500 से अधिक विद्यार्थियों की रोजाना पेटिंग की क्लास भी लेकर अच्छी खास आय कर लेते थे। इकलौती बेटी के कॅरियर के सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना कॅरियर ही बदल दिया।
बेटी निहिता जहां सीकर में जेईई की तैयारी में जुटी है वहीं शाह कोर्ट परिसर में चाय बेचते है। लोगों को सेहत उनकी चाय से नहीं बिगड़े इसलिए बिना दूध और चीनी की हर्बल चाय ही घूम-घूमकर बेचते है। शाह ने कोलकाता के नामी संस्थान से फाइन आर्ट में डिप्लोमा किया था। शाह कई नामी हस्तियों की भी पेटिंग बना चुके है।
मूलत: तालीगंज निवासी शाह ने बताया कि सीकर में खर्चा चलाने के लिए कुछ आमदनी तो चाय बेचकर हो जाती है और कुछ उन्होंने कोलकाता का मकान किराए पर दे दिया। उनका कहना है कि जिदंगी में एक ही मकसद है कि बेटी पढ-लिखकर अच्छी इंजीनियर बन जाए।
पत्रिका से खास बातचीत में शाह ने बताया कि चाय बनाने का उनका कोई अनुभव नहीं रहा। बेटी की पढ़ाई के लिए जब सीकर पहुंचे तो यहां आसानी से कोई रोजगार नहीं मिला। इस पर उन्होंने पत्नी सीमा से चर्चा की तो उन्होंने घर से चाय ले जाकर बेचने का आईडिया दिया। इसके बाद से वह कलक्ट्रेट परिसर में रोजाना चाय बेचने लगा।
शाह की चाय का कलक्ट्रेट व कोर्ट परिसर में आने वाले ज्यादातर अधिकारी व कर्मचारी दीवाने है। खास बात यह है कि इनके कलक्ट्रेट में पहुंचने से ही ऑर्डर आना शुरू हो जाते है।
Updated on:
09 Feb 2026 02:33 pm
Published on:
09 Feb 2026 02:33 pm
