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राजस्थान में पानी के अतिदोहन से उजड़ रही धरती की कोख, जानिए कैसे मिल सकती है राहत

मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ और उपजाऊ क्षमता खत्म होती जा रही है। पानी का पीएच मान निर्धारित स्तर से कई गुना बढ़ गया है।

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banjar bhummi

राजस्थान में पानी के अतिदोहन से उजड़ रही धरती की कोख, जानिए कैसे मिल सकती है राहत

सीकर. हरियाली उगलने वाली धरती की कोख अतिदोहन से उजड रही है। मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ और उपजाऊ क्षमता खत्म होती जा रही है। पानी का पीएच मान निर्धारित स्तर से कई गुना बढ़ गया है। लक्ष्मणगढ़ व फतेहपुर में अतिदोहन के कारण पानी का पीएच मान 12 तक पहुंच गया है। भूमि की गुणवत्ता कई पंचायत समितियों में 10 से 25 प्रतिशत तक खराब हो चुकी है। नतीजन फसलों से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल रहा है। लवणीयता बढऩे के कारण खेतों में फसल तो दूर पेड पौधे तक नहीं उग पाते हैं। लक्ष्मणगढ़,फतेहपुर और दांतारामगढ़ क्षेत्र के लोगों में हड्डियों संबंधी रोग अधिक हैं।

15 हजार हेक्टेयर भूमि हुई बंजर
सात वर्ष पहले आत्मा परियोजना में योजना के तहत 5 हजार 500 हैक्टेयर भूमि लवणीय और 30 हजार हैक्टेयर भूमि क्षारीय चिन्हित की गई थी। इसमें से 15 हजार हैक्टेयर भूमि पूरी तरह से बंजर हो चुकी है। सबसे अधिक खराब स्थितिफतेहपुर और लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र की है। दांता क्षेत्र के कुछ गांव की भूमि भी धीरे-धीरे बंजर हो रही है।

यह है कारण
पौधोंके लिए आवश्यक पोषक तत्व नाइट्रोजन,फास्फोरस और पोटाश होते हैं। जिनका आदर्श अनुपात (4-2-1) माना गया है। अनुपात में गड़बड़ी से प्रतिवर्ष 20-30 प्रतिशत उत्पादन कम मिल रहा है। मिट्टी की उपरी सतह पर बाइकार्बोनेटव सोडियम की परत जमा होने से भूमि में मौजूद पोषक तत्व पौधों को नहीं मिल पाते हैं। डीएपी की बजाए एसएसपी का प्रयोग करने से राहत मिलेगी।

हो सकता सुधार
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार भूमि का पीएच मान 9 से अधिक होने पर केवल जिप्सम से ही भूमि को सुधारा जा सकता है।

फैक्ट फाइल
कृषि विभाग स्थित प्रयोगशाला में खरीफ और रबी सीजन में जिले में मिट्टी व पानी के नमूने लिए गए। इन नमूनों में में नाइट्रोजन और आयरन का स्तर कम मिला। जिले में लिए गए 33,552 नमूने में 99 प्रतिशत नमूनों में नाइट्रोजन और आयन कम मिला। 35 प्रतिशत नमूनों में फास्फोरस कम रहा। वहीं 15 प्रतिशत नमूनों में पोटाश, जिंक, कॉपर व मैगनींज का स्तर कम मिला। वहीं पानी के 85 प्रतिशत नमूने ही सामान्य मिले।

-जिले के कई ब्लॉक में गहराई से आने वाली सिंचाई का पानी भूमि की सेहत बिगाड़ रहा है। फसलों की बुवाई से पूर्व मिट्टी-पानी की जांच करवा कर किसान कर इस समस्या को कम कर सकते है। संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने से उत्पादन में बढोतरी के साथ-साथ उर्वरा क्षमता में भी सुधार होगा।
शिवजीराम कटारिया, उपनिदेशक कृषि