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Maha Shivaratri 2018 : आज जानिए शिवजी के इस मंदिर का ऐसा इतिहास जो अब तक किसी को नहीं था पता

रामगढ़ कस्बा बसावट से पूर्व ही कस्बे के मध्य में प्रतापेश्वर महादेव मंदिर स्थित है।

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रामगढ़ शेखावाटी, सीकर.
रामगढ़ कस्बा बसावट से पूर्व ही कस्बे के मध्य में प्रतापेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण कब हुआ इसका किसी को पता नहीं है। मगर बताते है कि प्रतापेश्वर महादेव मंदिर गांव बसने से पूर्व नासा की ढ़ाणी के समय से ही था। पहले फिरास के पेड़ के पास एक छोटा सा मंदिर था। मुबंई प्रवासी सेठ तेजपाल पौद्दार की ओर से मंदिर का जीर्णाेद्धार किया गया। प्रतापेश्वर महादेव मंदिर में प्रत्येक रामगढ़ वासी हिंदू धर्मावंलम्बी की आस्था जुड़ी हुई है। प्रतापेश्वर महादेव मंदिर में प्रतिदिन रात्रि को शिव महिम्र का सस्वर पाठ किया जाता है। संभवत राज्य में इसी मंदिर में आरती के बाद भगवान शिव से विश्व के कल्याण, मानव में सद्भावना, गोमाता आदि के लिये प्रार्थना की जाती है। मंदिर का संचालन पूर्व में श्रीकृष्ण गौशाला के अधीन था। मगर कुछ समय पूर्व मंदिर के संचालन के लिये अलग से समिति बना दी गई है।

मंदिर में प्रत्येक प्रदोष को शिव जागरण का आयोजन किया जाता है। शिव रात्रि के उपलक्ष्य में कस्बे के ढप मंडलियों की ओर से शिवजी के आगे प्रस्तुति देकर ही ढप व चंग का आयोजन शुरू करते है। मंदिर की पूजा का जिम्मा वर्तमान में पुजारी परिवार के मंगलचंद तीस वर्षो से निभा रहे है। वैसे तो कस्बे में कई शिव मंदिर बने हुए है। मगर नगर में प्रतापेश्वर महादेव मंदिर का विशेष महत्व है। सावन माह में ग्यारह विप्र विद्वान की ओर से सस्वर रूद्राभिषेक पाठ, शाम को सामुहिक महिम्न के पाठ का आयोजन किया जाता है।