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अस्पताल को मिले जगह तो बन जाए मेडिकल कॉलेज

कॉलेज की व्यवस्था जांचेंगी एमसीआई की टीमनिरीक्षण की तैयारियों के लिए लेंगे बैठक

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अस्पताल को मिले जगह तो बन जाए मेडिकल कॉलेज



सीकर. सीकर मेडिकल कॉलेज के अधीन अस्पताल को पर्याप्त जगह मिल जाए तो शहर के लोगों को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल जाए। कारण जिला अस्पताल की पर्याप्त जगह नहीं होने और कमियों को पूरा नहीं कर पाने के कारण मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वीकृति नहीं मिल रही है। खास बात है कि जिला अस्पताल का पट्टा तक नहीं बन पाया है। इसके अलावा अस्पताल के वार्डों में बेड की संख्या भी कम है और उनका विभागवार आवंटन भी नहीं है। वहीं कॉलेज के भवन का अधूरा निर्माण है। वार्डों में साइड रूम नहीं है। नतीजन एमसीआई ने सीकर मेडिकल कॉलेज को इस सत्र में मान्यता देने से सिरे से इंकार कर दिया है।

इसलिए पिछड गया मेडिकल कॉलेज
सीकर मेडिकल कॉलेज के लिए पिछले साल कई बार निरीक्षण हो चुके लेकिन कमजोर इच्छा शक्ति के कारण छोटी-छोटी कमियों को पूरा नहीं हो सकी। मेडिकल कॉलेज के अधीन करने के बाद भी अटैच अस्पताल में इन्फ्रा स्ट्रक्चर और एमसीआई के मापदंड पूरे नही हो सके हैं। नए अस्पताल भवन के लिए जगह तो चिन्हित कर दी भवन खाली करवा दिए लेकिन फिर मॉनिटरिंग नहीं होने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।-

यह है नियम
मेडिकल कॉलेज से अटैच अस्पतालों की दूरी दस किलोमीटर से कम होनी चाहिए। इसके अलावा अटैच अस्पताल में चिकित्सा के मुख्य विभाग जैसे पीडियाट्रिक्स, गाइनी, मेडिसिन सर्जरी आदि होने चाहिए। अटैच अस्पताल में पांच ओटी होने चाहिए। गाइनी और पीडियाट्रिक वार्ड एक साथ होना चाहिए।


इनका कहना है
मैने अभी ज्वाइन किया है। मेडिकल कॉलेज से संबंधित दस्तावेजों को देखकर उच्चाधिकारियों से वार्ता की जाएगी। इसके बाद कॉलेज की शुरूआत में आने वाली जगह संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। अस्पताल के सभी विभागों के अध्यक्षों के विचार और सुझाव लिए जाएंगे।
डॉ. केके वर्मा, प्रिंसीपल मेडिकल कॉलेज सीकर