
खान-पान में नमक और तेल घी की मात्रा ज्यादा होने के कारण हाइपर टेंशन (उच्च रक्तचाप ) की बीमारी बढ़ती जा रही है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में एक साल में 43 हजार से ज्यादा मरीज हाइपर टेंशन के सामने आए हैं। यह खुलासा अस्पतालों की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार हुआ है। चिंताजनक बात है कि सेहत के लिए घातक इस बीमारी से बड़ी संख्या में पीड़ित होने के बावजूद लोगों में लापरवाही बढ़ रही है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार हाइपर टेंशन की गिरफ्त में गांवों की बजाए शहरों के युवाओं की संख्या ज्यादा है।
अकेले कल्याण अस्पताल की मेडिसिन विभाग में रोजाना ही चार दर्जन से ज्यादा मरीज हाइपर टेंशन की बीमारी के आ रहे हैं। हाइपर टेंशन के कारण ही व्यिक्त् असामयिक मौत के शिकार हो जाते हैं। साइलेंट किलर के रूप में चर्चित इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए हर साल 17 मई को विश्व हाइपर टेंशन डे मनाया जाता है। इस वर्ष हाइपरटेंशन डे 2024 की थीम अपने रक्तचाप को सटीक रूप से मापें, इसे नियंत्रित करें, लंबे समय तक जीवित रहें- रखी गई है।
हो रहे चिडचिड़े
चिकित्सकों के अनुसार फास्ट फूड में नमक की मात्रा ज्यादा होने के कारण चिडचिड़ाहट बढ़ रही है। इसके अलावा स्मार्ट फोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से व्यक्ति भ्रामक जानकारियों में पड़कर व्यर्थ की उत्तेजना और तनाव का शिकार होता है। वहीं इससे दिनचर्या भी अनियमित हो जाती है। इसके उपचार में लापरवाही के कारण शरीर में बीमारियां पनपने लगती हैं। उपचार नहीं कराने से हृदयाघात और पैरालिसिस का खतरा होता है।
हार्ट स्ट्रोक का खतरा
चिकित्सकों के अनुसार हाइपर टेंशन के कारण दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। जब शरीर में धमनी की दीवारों पर ब्लड प्रेशर सामान्य सीमा से अधिक हो जाता है तो उसे उच्च रक्तचाप कहते हैं. उच्च रक्तचाप को कंट्रोल करने के लिए समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकता है।
शुरू से रहें सतर्क
चिकित्सकों के अनुसार हाइपर टेंशन को लेकर शुरू से सतर्क रहने की जरूरत है। दिनचर्या को ठीक रखें। सुबह का नाश्ता हमेशा पौष्टिक करें। बॉडी को हाइड्रेट रखें। नमक कम खाएं। ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाएं। नियमित रूप से दवाएं लें। रोग शुरूआत से ध्यान नहीं देने से मरीज के सिर दर्द, सांस फूलना, चक्कर आना, कमजोरी और नाक से खून निकलने लगता है। उपचा नहीं मिलने से मरीज की जान तक चली जाती है।
इनका कहना है
सर्वे के अनुसार हाइपरटेंशन की दिक्कत युवाओं में बढ़ने लगी है। तनाव, नमक का अधिक सेवन करने व अनियमित दिनचर्या के चलते युवाओं के सामने समस्या आ रही है। खान-पान व दिनचर्या में सावधानी ही इसका उपचार है।
डॉ. निर्मल सिंह, सीएमएचओ सीकर
दो तरह का होता है हाइपर टेंशन
मेडिसिन विशेषज्ञों के अनुसार चिकित्सकों के अनुसार हाइपरटेंशन के 90 फीसदी मामले दिनचर्या और खान-पान में बदलाव से रोके जा सकते हैं। हाइपरटेंशन दो प्रकार का होता है। प्राइमरी हाइपरटेंशन और सेकेंडरी हाइपरटेंशन। प्राइमरी हाइपरटेंशन अनुवाशिंक कारण व खान-पान व शारीरिक श्रम नहीं करने से हो जाता है। सैकेंडरी हाइपरटेंशन कॉमन किडनी प्रॉब्लम या थायरॉयड डिसऑर्डर के कारण होता है। भारत में हाइपरटेंशन एक बड़ी समस्या है। शहरी क्षेत्रों में लगभग 33 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं. हालांकि इनमें से केवल 40 प्रतिशत शहरी और 25प्रतिशत ग्रामीण लोगों को ही इस बीमारी का पता है।
Published on:
18 May 2024 03:38 pm
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