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नेक्सा एवरग्रीन घोटाला: 62 हजार निवेशक हुए ठगी का शिकार, बड्स एक्ट से मिल सकती है खोई राशि

संपत्ति सहित आरोपियों के 3.75 करोड़ के दो बैंक खाते सीज

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सीकर

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Ajay Sharma

Mar 28, 2023

नेक्सा एवरग्रीन घोटाला: 62 हजार निवेशक हुए ठगी का शिकार, बड्स एक्ट से मिल सकती है खोई राशि

पुलिस की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

धोलेरा सिटी में निवेश के नाम पर हुई ठगी में फिर बड़ा खुलासा हुआ है। नेक्सा एवरग्रीन कंपनी में निवेश के नाम पर ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या 62 हजार सामने आई है। जिनसे करीब 2700 करोड़ रुपए ठगे गए। एसपी करण शर्मा ने बताया कि इनमें से करीब 1400 करोड़ रुपए तो आरोपियों ने लाभांश के रूप में निवेशकों को वापस लौटा दिए। जबकि 400 करोड़ रुपए बोनस या अन्य पुरस्कारों के रूप में बांट दिए। बाकी राशि की उन्होंने धोलेरा सिटी में एक हजार बीघा जमीन के अलावा अलग- अलग जगहों पर जमीन, होटल्स, रिजोर्ट व खानें खरीद ली। जिन्हें सीज करने की कार्रवाई जारी है। एसपी शर्मा ने 2019 के बड्स एक्ट (बैनिंग ऑफ एंड रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम) के तहत निवेशकों को उनकी राशि फिर से मिलने की संभावना भी जताई है।

3.75 करोड़ के दो बैंक एकाउंट सीज
एसपी शर्मा ने बताया कि पुलिस ने आरोपियों से जुड़े दो बैंक खातों को भी सीज किया है। ये खाते अहमदाबाद के थे। जिनमें 3.75 करोड़ रुपए जमा थे।

प्रदेशभर में 80 मुकदमे दर्ज, आरोपियों के साथ संपति की तस्दीक
नेक्सा एवर ग्रीन घोटाले में प्रदेशभर में अब तक करीब 80 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। जो सीकर के अलावा चूरु, झुंझुनूं, जयपुर व जोधपुर आदि जिलों में दर्ज हुए हैं। इनमें सीकर जिले के 33 मुकदमे शामिल है। मामले में पुलिस मुख्य आरोपियों अमरचंद ढाका, रणवीर बिजारणियां व सुभाष बिजारणियां तथा उपेंद्र को चार मार्च को महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर चुकी है। अब उन्हें साथ लेकर उनकी संपतियों की तस्दीक करवाकर पुलिस उन्हें सीज करने में जुटी है।

बड्स एक्ट में मिल सकती है राशि
ठगी का शिकार हुए लोगों के लिए भी अच्छी खबर है। उन्हें बड्स एक्ट के तहत निवेश की राशि वापस मिल सकती है। दरअसल, 2019 का ये एक्ट अनियमित जमा योजना को बढ़ावा देने, संचालित करने, विज्ञापन निकालने या जमा स्वीकार करने पर रोक लगाता है। अवैध रूप से राशि जमा करने पर सक्षम प्राधिकारी जमाकर्ता व्यक्ति या संस्था की संपत्तियों को जब्त कर उनका निष्पादन कर जमाकर्ताओं को रुपए वापस लौटा सकता है। एक्ट के तहत ठगों से प्राप्त संपति पर पहला हक जमाकर्ता का माना जाता है। एसपी शर्मा ने बताया कि पुलिस भी इसी दिशा में काम करेगी।