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Gang war: दोस्ती से शुरू हुई थी राजू ठेहट की आनंदपाल गैंग से दुश्मनी की कहानी, हत्याएं बढ़ाती रही रंजिश

सीकर. आनंदपाल के जानी दुश्मन राजू ठेहट की शनिवार सुबह गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। पिपराली रोड पर घर के बाहर ही चार बदमाश उस दनादन फायरिंग कर फरार हो गए।

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सीकर

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Sachin Mathur

Dec 03, 2022

Raju theth murder: दोस्ती से शुरू हुई थी राजू ठेहट की आनंदपाल गैंग से दुश्मनी की कहानी, कई हत्याओं ने गहरी की

Raju theth murder: दोस्ती से शुरू हुई थी राजू ठेहट की आनंदपाल गैंग से दुश्मनी की कहानी, कई हत्याओं ने गहरी की

सीकर. आनंदपाल के जानी दुश्मन राजू ठेहट की शनिवार सुबह गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। पिपराली रोड पर घर के बाहर ही चार बदमाश उस दनादन फायरिंग कर फरार हो गए। घटना की जिम्मेदारी लारेंस बिश्नोई गैंग ने ली है। जिसके रोहित गोदारा ने बलवीर बानूड़ा हत्या व आनंदपाल एनकाउंटर में हाथ होने पर ठेहट की हत्या करना कबूला है। पर कम ही लोग ये जानते हैं कि इस दुश्मनी की शुरुआत कभी दोस्ती से हुई थी। दोस्ती कैसे दुश्मनी में बदली उसी पर े पेश है ये रिपोर्ट।

बानूड़ा व राजू ठेहट थे दोस्त
दांतारामगढ़ उपखंड के जीणमाता के नजदीकी गांव ठेहट निवासी राजू ठेहट 1995 में अपराध की दुनिया में आया। वह बलवीर बानूड़ा के साथ शराब का कारोबार करने लगा। दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। 2004 तक दोनों एक दूसरे के जिगरी थे। दोनों ने मिलकर सीकर में भेभाराम हत्याकांड को अंजाम दिया। इसी बीच दोनों के नाम जीणमाता में लॉटरी में शराब का ठेका निकला। जिस पर बलबीर बानूड़ा के साले विजयपाल को सेल्समैन रखा गया। इसी विजयपाल से शराब ब्लैक करने को लेकर राजू ठेहट का विवाद हो गया। जिसमें ठेहट ने उसकी हत्या कर दी। ये हत्या राजू ठेहट व बलवीर बानूड़ा के बीच दुश्मनी की दीवार बन गई। इसके बाद बलवीर बानूड़ा ने अपनी अलग गैंग बना ली। जिसमें उसका दोस्त आनंदपाल भी सहयोगी हो गया। तब से दोनों गैंग के बीच हत्याओं का खूनी खेल शुरू हो गया।

ठेहट के संरक्षक फोगावट की हत्या ने बढ़ाई रंजिश
ठेहट से बदला लेने के लिए बलवीर बानूड़ा व आनंदपाल गैंग ने 2006 में उसके सहयोगी गोपाल फोगावट की हत्या कर दी। इससे दोनों के बीच दुश्मनी की खाई गहरी हो गई। दोनों गैंग एक दूसरे की खून की प्यासी हो गई। 2012 में बलबीर बानूड़ा, आनंदपाल व राजू ठेहट पुलिस के हत्थे चढ़ गए। जिसके बाद बलबीर बानूड़ा के साथी सुभाष बराल ने 2013 में उस पर सीकर जेल में हमला कर दिया। जिसमें वह बाल- बाल बचा। उधर, बीकानेर जेल में बंद आनंदपाल व बलबीर बानूड़ा पर 2014 में राजू ठेहट के भाई ओमा ठेहट के साले जेपी व रामप्रकाश ने फायरिंग कर दी। जिसमें बलबीर बानूड़ा की मौत हो गई।जबकि आनंदपाल बच निकला। इसके बाद 2017 में आनंदपाल को एनकाउंटर में मार गिराया गया। पर इसके बाद भी दोनों गैंग की दुश्मनी की आग ठंडी नहीं हुई।
जिसके बाद शनिवार सुबह राजू ठेहट की हत्या कर दी गई।

आनंदपाल गैंग की सहयोगी है लॉरेंस बिश्नोई गैंग
राजू ठेहट की हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्रोई गैंग ने ली है। जिस पर संदेह होना भी लाजिमी है। क्योंकि लॉरेंस बिश्नोई व आनंदपाल दोनों दोस्त रहे हैं। दोनों की गैंग एक दूसरे की सहयोगी रही है। आनंदपाल एनकाउंटर के बाद बलवीर बानूड़ा का बेटा सुभाष भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग में शामिल हो गया। जिसका नाम हाल में पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसावाला हत्याकांड में भी सामने आया था।