
सीकर.
भाई-बहनों के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन सोमवार को जिले में धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर प्यार की डोर बांधी और उनकी आरती उतार कर माथे पर चंदन का तिलक लगाया और उनका मुंह मीठा कराया। वहीं, भाइयों ने इसके बदले उन्हें गिफ्ट दिया और उम्रभर उनकी रक्षा करने का वचन दिया।
शेखावाटी के कण-कण में वीरता व देशभक्ति है। देश की सरहदों पर अपने प्राणों की बाजी लगाने वाले शहीदों की शहादत को आज भी बहनों ने चिर स्थायी बनाया हुआ है। रक्षाबंधन पर जिले में स्थित कई स्थानों पर बहनों ने शहीद प्रतिमाओं पर राखियां बांधकर शहादत को श्रद्धांजलि दी और रिश्तों की डोर को मजबूत किया। शहीद प्रतिमा स्थल पर बहनों ने मंगलगीत गाए और कलाइयों पर राखियां सजाकर शहादत कोअजर-अमर रहने की मंगल कामनाएं की।
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जाजोद की कमला देवी ने बताया कि उसका छोटा भाई सुभाषचंद्र २००५ में शहीद हो गया था। २०१२ में रलावता में शहीद की प्रतिमा लगने के बाद से हर रक्षाबंधन पर वह राखी बांधती हैं। गर्व के साथ यहां अपने परिवार को लेकर आती हूं और शहीद प्रतिमा को राखी बांधकर बहन होने का फर्ज निभाती हूं। उदनसर की परमेश्वरी देवी का कहना है कि उसका भी छोटा भाई मुखराम बुडानिया २००३ में आंतकियों से लड़ते हुए शहीद हो गया था। उसके एक साल बाद पीहर में उसकी शहीद प्रतिमा लगी। रक्षाबंधन के दिन १२ किलोमीटर का सफर तय कर प्रतिमा स्थल पहुंचती हूं और सबसे पहले यहां राखी बांधती हूं। इधर, झीगर छोटी की कमला, भगवती देवी और रामपुरा की संतरा देवी के अनुसार उनका भाई महेश कुमार सेना में लांस नायक था। २००४ में बारामुला में आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हो गया था। २००५ में उसकी प्रतिमा भैरूपुरा गांव में स्थापित हुई। उसके बाद से तीनों बहनें एक साथ भैरूपुरा प्रतिमा स्थल पर राखी बांधती हैं।
Published on:
08 Aug 2017 02:49 pm
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