सीकर

100 वर्षीय चुन्नीलाल की तीन बजे होती है सुबह, पहाड़ी पर चढऩे, देसी खाने व चार किमी सैर से जी रहे नीरोगी जीवन

सचिन माथुरसीकर. सौ वर्ष की उम्र पाना हर किसी का सपना होता है। लोग इसके नुस्खे भी तलाशते व आजमाते रहते हैं। पर कोई विरला ही जीवन की शतकीय पारी खेल पाता है।

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Oct 01, 2023
100 वर्षीय चुन्नीलाल की तीन बजे होती है सुबह, पहाड़ी पर चढऩे, देसी खाने व चार किमी सैर से जी रहे नीरोगी जीवन

सीकर. सौ वर्ष की उम्र पाना हर किसी का सपना होता है। लोग इसके नुस्खे भी तलाशते व आजमाते रहते हैं। पर कोई विरला ही जीवन की शतकीय पारी खेल पाता है। आज हम आपको देवगढ़ गांव के एक ऐसे ही शख्स चुन्नीलाल गुर्जर से मिलवाते हैं, जो उम्र का सैंकड़ा पार करने के बाद भी बिल्कुल स्वस्थ है। चलने- फिरने व अपने निजी काम खुद करने के साथ वे सीढिय़ां व ऊंचाई वाली जगहों पर भी आसानी से चढ़- उतर लेते हैं। देसी खान-पान, नियमित दिनचर्या और खुशमिजाजी को लंबी उम्र का राज बताने वाले चुन्नीलाल का आत्मविश्वास भी ऐसा है कि वे अब भी 15-20 साल और आराम से जीने का दावा भी करते हैं।

तीन बजे होती है सुबह, चार किमी की सैर
खुद को सौ साल पार बताने वाले चुन्नीलाल छह घंटे ही सोते हैं। रात को नौ बजे सो कर वे सुबह तीन बजे ही उठ जाते हैं। चार बजे चाय पीने के बाद उजाला होने पर गांव में सैर को निकल जाते हैं। शाम को भी गांव में घूमते हैं। रोजाना करीब तीन से चार किमी पैदल चलाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। अपने कपड़े अपने ही हाथ से धोने के अलावा वे अपने सारे निजी काम खुद ही करते हैं।

नशे से रहे दूर, पहाड़ी चढऩा था आम

अपनी लंबी आयु का राज चुन्नीलाल नशे से दूरी व पहाड़ की चढ़ाई को भी बताते हैं। उनके अनुसार वे जर्दा, तंबाकू, बीड़ी व शराब से हमेशा दूर रहे। घर के नजदीक ही होने पर कुछ साल पहले तक पहाड़ी पर स्थित देवगढ़ किले तक चढऩा भी उनके लिए आम था। किलेदारों से ही पढऩे पर बचपन में तो किले पर चढऩा उनका रोजाना का काम था। अपनी इस दिनचर्या के चलते आज भी उन्हें सांस फूलने सरीखी समस्या नहीं है।

देसी खाना, मिठाई से परहेज
चुन्नीलाल सिर्फ देसी खाना खाते हैं। बेटे केसर ने बताया कि पिछले साल तक वे घर की देसी गाय का ही दूध पीते थे। गाय बिकने के बाद अब वे मोल का आधा किलो दूध पीते हैं। गर्मियों में अपने खेत के देसी गेहूं की चूल्हे पर बनी रोटी, देसी सब्जी और खाटे की राबड़ी व दही-छाछ तथा सर्दियों में बाजरे की रोटी व राबड़ी उनका स्थाई भोजन है। जिसका समय भी दोपहर करीब 12 बजे और शाम करीब आठ बजे का तय है। वे बाहर की कोई मिठाई भी नहीं खाते।

तनाव रहित खुश मिजाज जीवन

चुन्नीलाल खुशमिजाज जीवन बिताते हैं। उनके आठ बेटे- बेटी तथा छह पोते व तीन पोतियों का खुशहाल परिवार है। जिनके बीच भगवान का नाम जपते हुए व हंसी ठिठौली करते हुए वे पूरी तरह तनाव रहित रहते हैं। बात- बात पर मुस्कुराकर वे चर्चा करने वाले का भी मन मोह लेते हैं। 99 साल तक दवाओं से दूर रहे चुन्नीलाल चिकित्सकों की सलाह पर अब कभी- कभी ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं।

Published on:
01 Oct 2023 11:16 am
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