
जब मैंने जन्म ही नहीं लिया तो मेरी मौत कैसे हो सकती है...इस शख्स की ये बात सुन सब रह गये हैरान
खंडेला. जोधावाली (रलावता) में चल रही श्रीमद् भागवत कथा का बुधवार को समापन किया गया। कथा समापन के बाद भंडारा हुआ। कथा के सातवें दिन आचार्य संतोष पाठक महाराज ने बताया कि शुकदेव जी कहते हैं कि हे राजन दतात्रेय महाराज ने 24 गुरु बनाए जिनमें पृथ्वी को गुरु बनाकर उससे सीखा की एक संत को पृथ्वी की तरह क्षमावान आचरण शील होना चाहिए। जल से सीखा कि संत को हर समय विचरण करते रहना चहिए। मधुमक्खी से सीखा कभी संग्रह नहीं करना चाहिए। ये सब बताने के बाद शुकदेवजी ने राजा परीक्षित से पूछा कि राजन क्या आप मरोगे तो राजा परीक्षित कहते हे कि प्रभु जब मैंने जन्म ही नहीं लिया तो मृत्यु कैसी। ये तो शरीर का काम है
आत्मा तो अजर अमर है। भगवान के नाम के बिना जीव की गति मुक्ति नहीं हो सकती है। इसलिए ठाकुर जी का स्मरण करते रहे। इसके अलावा कस्बे के निकट खंडेला धाम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य रविकांत महाराज ने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि जब इन्द्रदेव नाराज हो गए तो उन्होंने मूसलाधार बरसात शुरू कर दी। सभी लोग इस बारिश से परेशान हो गए तो भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर सब की रक्षा की थी। कथा के दौरान इस दृश्य की जीवंत झांकी भी सजाई गई।
बाल लीला का वर्णन
पलसाना. इलाके के सुन्दरपुरा गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की कथा का मंचन किया गया। कथा वाचक पंडित दीनदयाल शास्त्री ने बताया कि भगवान की भक्ति से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में मनुष्य को सदमार्ग पर चलते हुए कर्म के साथ भगवान की भक्ति करनी चाहिए।
रुकमणी विवाह प्रसंग
अजीतगढ़. इच्छापूर्ण बड़वाले बालाजी धाम पर श्रीमद भागवत कथा में रुकमणी विवाह प्रसंग सुनाया गया। पं. मोहन शरण पुजारी ने कहा कि अभिमान रहित मनुष्य भगवान को सहज ही प्राप्त कर सकता है। कथा मे अलवर की कलाकारों ने नृत्य नाटिका कर श्रद्धालुओं का मन मोहा। गरुवार को सुदामा चरित्र का वृतांत सुनाया जाएगा।
Published on:
24 May 2018 03:34 pm
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