
सीकर. सरकारी सब्जबाग कहें या किसानों का दुर्भाग्य। जिले में प्याज के उत्पादन को देखते हुए सरकार पिछले 15 वर्ष से किसानों के साथ खिलवाड़ कर रही है। भले ही सरकार ने दस वर्ष पहले प्याज उत्पादन में अग्रणी सीकर जिले के नासिक 'रसीदपुराÓ में प्याज की विशिष्ट मंडी खोलने की घोषणा कर दी लेकिन प्याज मंडी शुरू नहीं होने से पहले से कर्ज में डूबे किसानों को लागत से कम मूल्य पर प्याज बेचना पड़ रहा है। रही सही कसर प्याज भंडारण के ढांचे नहीं होने से हो गई है। फतेहपुर मंडी ने इस सीजन में रसीदपुरा मंडी के लिए 60 भूखंड आवंटन की प्रक्रिया शुरू की लेकिन रसीदपुरा मंडी को सीकर मंडी के अधीन कर दिया गया। नतीजन भूखंड आवंटन की प्रक्रिया भी रुक गई है। इस कारण इस सीजन में प्याज मंडी शुरू नहीं हो पाएगी। मजबूरी में किसानों को हाड़तोड मेहनत से तैयार प्याज के भाव नहीं मिलेंगे। सीकर जिले में इस बार प्याज की बुवाई दस हजार हेक्टैयर में हुई है। जिनसे अनुमानित उत्पादन तीन लाख मीट्रिक टन आंका जा रहा है।
डेढ दशक से सियासत
रसीदपुरा गांव के पास 30 बीघा में तैयार हुए प्याज मंडी पर पिछले कई साल से राजनीतिक सियासत चल रही है। प्याज मंडी की घोषणा के बाद से धोद और दांतारामगढ़ के जनप्रतिनिधियों में खींचतान की स्थिति रही और प्याज मंडी की उत्तरी भारत की सबसे बड़ी प्याज मंडी बनाने का सपना कागजों में ही रह गया। हालांकि करीब तीन वर्ष पहले भाजपा सरकार ने लोगों के भारी दवाब को देखते हुए हाइवे फेसिलिटी सेंटर की भूमि को आवप्त तो कर लिया लेकिन मंडी का निर्माण शुरू नहीं हो पाया। बजट को लेकर धोद विधायक और कृषि मंत्री में तकरार हो गई। बाद में एमडीएस फंड से बजट मिलने पर तरह फतेहपुर मंडी ने निर्माण शुरू करवाया लेकिन निर्माण शुरू होते ही फिर राजनीति शुरू हो गई। रसीदपुरा मंडी को फतेहपुर की बजाए सीकर मंडी के अधीन कर दिया। सीकर मंडी के अधीन करने के बाद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नतीजन किसानों को फायदा नहीं मिल रहा है।
सीजन शुरू, फिर भी कारोबार नहीं
रसीदपुरा प्याज मंडी में इस साल भी कारोबार शुरू नहीं हो पाएगा। क्योंकि सीजन शुरू हो चुका है और मंडी में अभी भूखंड तक आवंटित नहीं हुए हैं। रसीदपुरा क्षेत्र के 40 से ज्यादा गांव और ढाणियों के 50 हजार से ज्यादा किसान प्याज के उत्पादन से सीधे जुड़े हुए हैं। यहां के प्याज की भागीदारी कुल उत्पादन में 30 फीसदी तक रहती है। इसके बावजूद सरकार ने यहां प्याज भंडारण के लिए ढांचे तक नहीं बनवाए हैं।
यूं दिखा रही सब्जबाग
सीकर जिले के प्याज उत्पादक किसानों को हर साल कमजोर भावों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता है। भाव नहीं मिलने पर किसानों को प्याज की फसल पर टे्रक्टर चलवाने पड़ते हैं। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन ने इस और ध्यान नहीं दिया है। हालांकि किसानों के आंदोलन के बाद सरकार जरूर सरकारी खरीद शुरू करने की घोषणा करती है लेकिन तब तक किसानों का ज्यादातर प्याज बाजार में बिक जाता है।
Published on:
19 Mar 2018 06:20 pm

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