
सीकर.
देश को सर्वाधिक सैनिक देने वाले शेखावाटी के फौजियों को ट्रेन की सुविधा का पूरा फायदा नहीं मिल रहा। सीकर से उधमपुर तक पूरा ट्रेक बिछा हुआ है, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण इस ट्रेक पर ट्रेन नहीं चल रही। यदि इस ट्रेक पर ट्रेन शुरू हो जाए तो सीकर, चूरू व झुंझुनूं के हजारों फौजियों को सस्ता व सुगम यात्रा का लाभ मिल सकता है। अभी ट्रेन नहीं चलने के कारण उनको बसों से महंगा, देरी वाला व जोखिमपूर्ण सफर करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार सीकर से उधमपुर के बीच सेना की करीब 26 छावनियां व केंट हैं। ऐसी कोई छावनी नहीं है, जिसमें शेखावाटी के फौजी व अधिकारी नहीं है। यहां तक कि कई छावनियां तो ऐसी हैं जिनमें सर्वाधिक फौजी ही शेखावाटी अंचल के हैं।
धार्मिक यात्रा भी हो जाएगी
सीकर से उधमपुर के बीच ट्रेन चलने से एक और बड़ा फायदा हो जाएगा। शेखावाटी से वैष्णोदेवी की यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों को भी फायदा हो जाएगा। अभी केवल चूरू से एक ट्रेन है वह भी सीधी व नियमित नहीं है। इसके अलावा सीकर व झुंझुनूं से कोई ट्रेन नहीं है। इस कारण श्रद्धालुओं को यह धार्मिक यात्रा भी निजी वाहनों या बसों से करनी पड़ रही है। इस कारण समय व धन ज्यादा लग रहा है। इसके बावजूद सफर जोखिमपूर्ण हो रहा है।
यहां हैं छावनिया व केंट
सीकर से उधमपुर के बीच सिरसा, हिसार, भटिंडा, फाजिल्का, फिरोजपुर केंट, लुधियाना केंट, जालंधर, पठानकोट, जम्मू व उधमुपर में करीब 26 छावनियां व केंट हैं। सीकर से चूरू होते हुए हिसार, भटिंडा, फिरोजपुर, लुधियाना, जालंधर, पठानकोट, जम्मू व उधमपुर तक सीधा ट्रेक भी है। इस ट्रेक पर ट्रेन चलने से फौजियों को आने-जाने में भी समय कम लगेगा। अभी बसों के कारण तीन-चार छुट्टियां तो उनकी बस में ही निकल जाती है। सीकर से उधमपुर के बीच करीब सात सौ किलोमीटर की दूरी है। इस मार्ग पर बस से सफर करने में दोगुना समय लग रहा है, जबकि ट्रेन में करीब आधा ही समय लगेगा।
Published on:
21 Apr 2018 08:33 am

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