
'बा' से प्रभावित हुई पाकिस्तान से आई सुमित्रा, 2 हजार से ज्यादा निराश्रित बच्चों के लिए बनी 'मां'
सीकर. पाकिस्तान से ब्याहकर राजस्थान आई सुमित्रा देवी समाज सेवा की नायाब नजीर है। महात्मा गांधी की पत्नी कस्तूरबा के सेवा भाव से प्रभावित सुमित्रा उन्हीं के नाम से कस्तूरबा सेवा संस्थान का संचालन 32 साल से कर रही है। जिसमें अब तक 2 हजार से ज्यादा निराश्रित बच्चों को पाल- पढ़ाकर वह उनकी मां की भूमिका निभा चुकी है। 94 साल की सुमित्रा देवी संस्थान में अब भी 52 बच्चों की परवरिश कर रही हैं। जो मां...मां...कहकर उनके इर्द- गिर्द ही मंडराते रहते हैं। सुमित्रा देवी को शेखावाटी की मदर टेरेसा भी कहते हैं।
डॉक्टर, इंजीनियर व टीचर बने बच्चे, संस्थान को पीहर मानती है लड़कियां
कस्तूरबा सेवा संस्थान से निकले कई अनाथ बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर व शिक्षक बन चुके हैं। वहीं, 6 लड़कियों की सुमित्रा देवी शादी भी करवा चुकी है। जो कस्तूरबा संस्थान को अपना पीहर मानती है।
शादी के बाद पाकिस्तान से आई राजस्थान
सुमित्रा देवी की परवरिश पाकिस्तान में हुई। दरअसल हरियाणा के रोहतक में 1928 में जन्म के 10 दिन बाद ही पिता की मौत होने पर उनके नाना शिवदयाल शर्मा उन्हें पाकिस्तान के कराची शहर ले गए थे। वहीं पढऩे के बाद 15 वर्ष की उम्र में उनकी शादी अलवर निवासी देवीदयाल शर्मा से हुई। जिनके स्थानंातरण पर 1955 में वह साथ ही सीकर रहने लगी।
कस्तूरबा गांधी से प्रभावित होकर शुरू की संस्था
सुमित्रा देवी ने नाना स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी के सहयोगी थे। उनके जरिये सुमित्रा का भी गांधी परिवार से संपर्क हुआ। उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी को जब उन्होंने निर्मल मन से सबकी सेवा करते देखा तो वे उनसे बहुत प्रभावित हुई। उसी भाव को मन में रख उन्होंने किराये के मकान में कस्तूरबा सेवा संस्थान की नींव रखी।
खुद के खर्चें पर की बच्चों की देखभाल
सुमित्रा देवी ने 1960 में बेसहारा बच्चों का सहारा बनने का संकल्प लिया। बजाज रोड पर एक किराये का मकान लेकर उन्होंने तीन निराश्रित बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। बच्चे बढ़े तो 1990 में नवलगढ़ रोड पर किराए का मकान लेकर अपने खर्च पर बच्चों को पाला व पढ़ाया। पति की भारतीय जीवन बीमा निगम से सेवानिवृत होने पर मिली राशि भी इस संस्था में ही लगा दी। 1998 में संस्था के पंजीकरण के बाद 2007 में सरकार ने भादवासी में जमीन देकर अनुदान शुरू किया। अब भी अपने पेंशन की राशि वह संस्थान में ही खर्च करती है।
Updated on:
01 Jan 2023 01:59 pm
Published on:
01 Jan 2023 01:36 pm

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