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राजस्थान के ये कवि देश-विदेशों में बढ़ा रहे गौरव, लाखों का पैकेज छोड़ चुन ली ‘कविताएं’

देश- दुनिया के दिलों पर राज करने वाले ऐसे ही कुछ कवि शेखावाटी की वीर प्रसूता भूमि से भी जन्मे हैं, जिनकी कविताएं मारवाड़ी का मान बढ़ा रहा है।

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सीकर

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Akshita Deora

Mar 21, 2025

World Poetry Day 2025: कहते हैं कि जहां ना पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि.. यानी कवि अपनी कल्पना शक्ति से उन अनछुए विषयों से लेकर दिल के गहरे कोनों तक को छू लेता है, जहां कोई नहीं पहुंच सकता। देश- दुनिया के दिलों पर राज करने वाले ऐसे ही कुछ कवि शेखावाटी की वीर प्रसूता भूमि से भी जन्मे हैं, जिनकी कविताएं मारवाड़ी का मान बढ़ा रहा है।

हरीश हिंदुस्तानी: राजस्थानी भाषा के अंतरराष्ट्रीय कवि

नवलगढ़ निवासी हरीश हिंदुस्तानी राजस्थानी भाषा के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के हास्य कवि हैं। अपने चुटिले अंदाज व हाजिर जवाबी के लिए मशहूर हिंदुस्तानी अपनी 21 वर्षों की काव्य यात्रा में छह देशों में 1835 राष्ट्र स्तरीय कवि सम्मेलनों में काव्य पाठ व मंच संचालन का अनूठा रिकॉर्ड बना चुके हैं। टीवी कार्यक्रम गोरबंद का चार साल से संचालन कर रहे हिंदुस्तानी कई राज्य व राष्ट्र स्तरीय पुरस्कारों सहित नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहाल से भी साहित्य सेवा पुरस्कार का सम्मान पा चुके हैं। उनकी ’हो मन में श्रद्धा, वहीं प्रभू दरबार होता है’ कविता लोगों के दिलों पर राज कर रही है।

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विष्णु पारीक: लंदन से मिला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड

ब्रिटेन की मल्टीनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, जीएलएफ एक्सीलेंस व शेखावाटी हिंदी साहित्य सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरुस्कार प्राप्त सीकर निवासी विष्णु पारीक लेखन, कविता पाठ व मंच संचालन में अमिट हस्ताक्षर बन गए हैं। सैंकड़ों राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में कविता पाठ व मंच संचालन कर चुके विष्णु विशाल शब्द कोष व संगत वाक्य रचना के लिए कवि कुमार विश्वास सहित कई कवियों व संतों से प्रशंसा पा चुके हैं। हाल में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आवास पर आयोजित फागोत्सव में मंच संचालन करने वाले विष्णु की ’शेखावाटी धरा निराली अनुपम इसकी गाथा है’ जैसी कालजयी कविता कई कवि सम्मेलनों की शोभा बढ़ा चुकी है।

विवेक पारीक : लाखों का पैकेज छोड़ बने वीर रस के कवि

लक्ष्मणगढ़ निवासी विवेक पारीक एमटेक के बाद लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर कुमार विश्वास, शैलेश लोढ़ा, सुरेंद्र शर्मा, अरुण जैमिनी व वसीम बरेलवी जैसे नामचीन कवियों के साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच साझा कर रहे हैं। ओजस्वी लहजे में ’रजपूती रजवट री रणथल म बलिदानी परिपाट अठे’ सरीखे वीरों व शहीदों पर उनके काव्य पाठ दिलों में वीररस के भाव भर देते हैं। मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से श्रेष्ठ छात्र कवि का सम्मान पा चुके विवेक की शॉर्ट फ़िल्म फ़ोटोग्राफ़र बैंगलुरू के फिल्म फेस्टिवल में चयनित हो चुकी है। इसी साल रिलीज होने वाली फ़िल्म ‘‘धूड़’’ में भी वे अहम भूमिका में दिखेंगे।

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