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दो साल से चल रहा था आरजीएचएस में महंगी जांच’ का खेल !

सीकर. राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के तहत अनियमितताओं के आरोपों में सात चिकित्सकों को निलंबित किए जाने के बाद शनिवार को चिकित्सकों में हडकम्प रहा। हाल यह रहा कि अधिकांश चिकित्सक और दवा विक्रेता योजना के नाम पर पर्ची पर दवा लिखने और वितरण से कतराते नजर आए। निलम्बन की कार्रवाई को लेकर दिनभर […]

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सीकर

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Ajay Sharma

Feb 15, 2026

RGHS Update Rajasthan doorstep delivery medicines scheme When start a year has passed since announcement pensioners worried

फाइल फोटो पत्रिका

सीकर. राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) के तहत अनियमितताओं के आरोपों में सात चिकित्सकों को निलंबित किए जाने के बाद शनिवार को चिकित्सकों में हडकम्प रहा। हाल यह रहा कि अधिकांश चिकित्सक और दवा विक्रेता योजना के नाम पर पर्ची पर दवा लिखने और वितरण से कतराते नजर आए। निलम्बन की कार्रवाई को लेकर दिनभर अलग-अलग कयास लगाए गए। जिन मरीजों की पर्चियों की ऑडिट हुई है उनमें सभी पर्ची सरकारी अस्पताल से कटी हुई थी इसलिए संभवत लैब स्तर पर पर्ची में हेरफेर करके अनावश्यक जांच लिख कर भुगतान उठाया है। चिकित्सकों के अनुसार सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले आरजीएचएस के मरीजों के स्लिप पर कहीं भी किसी मरीज को पहचान का कोई तरीका नई होता है। जिसका फायदा उठाते हुए योजना में पर्ची कटवाने के बाद सक्रिय लपके पात्र कार्ड धारक की जगह दूसरे मरीज को लेकर दिखाने पहुंच जाते हैं। जबकि निजी अस्पताल में यह प्रावधान है कि कि मरीज को खुद आना पड़ता है। यही कारण है कि एक ही मरीज की पर्ची में जांचों की संख्या बढ़ जाती है। इसका फायदा लैब संचालक ने उठाया और जांचों की संख्या बढ़ा दी। ऐसे में अब जांच का दायरा लैब संचालक तक बढ़ाया जाना चाहिए, न कि केवल चिकित्सक पर सवालिया निशान लगाए जाएं।

दो साल से चल रहा था खेल

कई चिकित्सकों के अनुसार चिकित्सकों के अनुसार मामला वर्ष 2023-24 का है, दो साल से आरजीएचएस योजना में महंगी जांच का खेल चल रहा था। उस दौरान जिला मुख्यालय पर आरजीएचएस योजना से केवल एक ही लैब सम्बद्ध थी और यही कारण रहा कि अधिकांश जांच उस लैब पर हुई है। आरोप है कि उसी अवधि में जांचों की संख्या और लागत असामान्य रूप से बढ़ी। इस दौरान बड़ी संख्या में िाटी स्कैन, एमआरआई जैसी महंगी जांचें शामिल रहीं। योजना में औसतन एक मरीज पर जांच का खर्चा सामान्य से 2 से 3 गुना अधिक दर्शाया गया। निलंबित चिकित्सकों का कहना है कि उन्होंने पर्ची पर केवल आवश्यक जांच ही लिखी थी। मरीज ने जांच कहां करवाई, यह चिकित्सकों के नियंत्रण में नहीं है।

इनका कहना है

आरजीएचएस योजना में चिकित्सक के निलंबन का मामला वर्ष 2023-24 और 24-25 के दौरान सरकारी अस्पताल से काटी गई पर्चियों की ऑडिट में हुआ है। चिकित्सकों ने किसी भी मरीज को सरकारी अस्पताल के अलावा कहीं और जांच के लिए नहीं कहा गया ये मरीज पर निर्भर करता है कि वो जांच कहां करवाता है।

डॉ. केके अग्रवाल, अधीक्षक कल्याण अस्पताल