4 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

परिवहन अधिकारी ने जिस कार्मिक को सुरक्षा गार्ड बताया था, असल में वह चालक के पद पर था तैनात

परिवहन कार्मिक की मौत के मामले में नया मोड़ पुलिस जांच में सच आया सामने-हादसे के वक्त मौके पर ही थे डीटीओ

3 min read
Google source verification
sirohi

SIROHI

सिरोही. शिवगंज हाइवे पर पिछले दिनों ट्रक की चपेट में आने से परिवहन गार्ड की मौत के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। जिस संविदा कार्मिक को विभागीय अधिकारी सुरक्षा गार्ड बता रहे थे, असल में वह परिवहन विभाग की गाड़ी पर चालक के पद पर तैनात था। ऐसे में जब चालक ही गाड़ी से नीचे उतर गया था तो जिला परिवहन अधिकारी के वाहन को आगे कौन लेकर गया था? इतना ही नहीं पालड़ी एम थाना पुलिस की जांच में भी साफ हो गया कि हादसे के समय डीटीओ मनीष शर्मा मौके पर ही थे और कार्मिक की मौत के बाद मौके से भाग गए थे।

यह था मामला
गौरतलब है कि ११ दिसम्बर २०१७ को तडक़े सिरोही के जिला परिवहन अधिकारी मनीष शर्मा टीम के साथ शिवगंज फोरलेन हाइवे पर वाहनों की चैकिंग करने निकले थे। इस दौरान पालड़ी एम थाना क्षेत्र में ओवलोड वाहनों की चैकिंग कर रहे थे। तब सिरोही की ओर से तेज गति से आए ट्रक ने परिवहन विभाग के संविदा गार्ड नरपतसिंह चारण (चालक) को टक्कर मार दी थी। जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। इसको लेकर संविदाकर्मी सुरक्षा गार्ड चन्द्रदेव माली की ओर से पालड़ी एम थाने में आरोपित ट्रक चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया गया था।

ऐसे बड़े सवाल...जिनके जवाब मांग रही जनता

ऐसी क्या जरूरत थी जो चालक को छोड़ खुद वाहन ले गए?
डीटीओ को ऐसी क्या जरूरत थी जो चैकिंग के दौरान शौच करने गए संविदा चालक को साथ लेने के लिए इंतजार तक नहीं किया और खुद वाहन को वहां से ले गए। विभागीय जांच में सामने आया है कि डीटीओ ने हादसे के करीब १५ मिनट बाद नरपतसिंह को फोन करने शुरू कर दिए थे। करीब चौदह-पन्द्रह बार फोन करने पर भी रिसीव नहीं हुआ। बड़ा सवाल यह कि इतनी बार फोन करने पर भी रिसीव नहीं हुआ तो क्या डीटीओ का दायित्व नहीं बनता था कि वे वहां जाकर पता करे कि आखिर चालक नरपतङ्क्षसह गया कहां?
सूत्रों की माने तो हादसे के बाद मौके से भागकर डीटीओ ने मृतक के मोबाइल पर फोन किया, ताकि किसी को शक नहीं हो कि परिवहन विभाग की टीम मौके पर ही मौजूद थी।

डीटीओ ने झूठ क्यों बोला कि वे घटनास्थल पर नहीं थे?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि डीटीओ ने आखिर झूठ क्यों बोला कि वे हादसे के वक्त मौके पर थे ही नहीं? ऐसा क्या कारण रहा कि हादसे के बाद काल-कवलित हुए साथी को अस्पताल पहुंचाने, संभालने या पुलिस को सूचना देने की बजाय उन्होंने भागना ज्यादा मुनासिफ समझा। यदि घबराहट में वहां से निकल लिए थे तो पुलिस जांच में यह बात बताई क्यों नहीं? इतना ही नहीं पुलिस की ओर से फोन करने के बाद भी करीब दो घंटे तक डीटीओ मोर्चरी नहीं पहुंचे। ऐसा क्यों?

चैकिंग के लिए अवकाश के दिन ही क्यों ?
जिला परिवहन अधिकारी ने वाहनों की चैकिंग पर जाने के दौरान किसी परिवहन निरीक्षक को भी साथ नहीं लिया था। हालांकि विभागीय जांच में सामने आया कि परिवहन निरीक्षक अजय पुरोहित अवकाश पर थे। ऐसे में परिवहन अधिकारी स्वयं चैकिंग पर निकल गए थे। सवाल यह कि रविवार को परिवहन कार्यालय में अवकाश रहता है। फिर उनको ऐसी क्या नौबत आ गई कि रविवार तडक़े वाहनों की जांच के लिए निकलना पड़ा और वह भी बिना निरीक्षक के?

ये सच्चे या वो...
जिला परिवहन कार्यालय सिरोही के गार्ड/चालक की सडक़ हादसे में मौत के मामले में विभागीय स्तर पर भी जांच की गई। प्रादेशिक परिवहन अधिकारी की ओर से १४ दिसम्बर २०१७ को अतिरिक्त प्रादेशिक परिवहन अधिकारी नेमीचंद पारीक को जांच सौंपी गई थी। इसके बाद जांच अधिकारी की ओर से सम्बंधित अधिकारी-कर्मचारियों के बयान, घटना स्थल के आस-आस की होटल्स एवं पुलिस आईओ से पूछताछ कर रिपोर्ट तैयार की गई,लेकिन विभागीय रिपोर्टमें जिला परिवहन अधिकारी के बचाव के तथ्य पेश कर डीटीओ को क्लीन चिट दी है लेकिन पुलिस की जांच इन तथ्यों को झुठलाने के लिए काफी है।

इनका कहना है...
हादसे के समय जिला परिवहन अधिकारी व अन्य स्टाफ मौके पर ही मौजूद था। लेकिन हादसा होने के बाद मौके से निकल गए थे।
-जितेन्द्रसिंह, एएसआई एवं अनुसंधान अधिकारी, पुलिस थाना, पालड़ी एम

गार्ड को ही चालक के तौर लगाते हैं। वहीं सभी गार्ड, इंस्पेक्टर व मेरे खुद के पास ड्राइविंग लाइसेंस है, तो कोईभी वाहन चला सकता है। ऐसे में उस समय किसी दूसरे ने वाहन चला लिया था। पुलिस जांच में क्या तथ्य है आए हैं, इसका पता नहीं, लेकिन यह मामला उस समय ही निपट गया। अब क्या मतलब है।
-मनीष शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी, सिरोही