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आबूरोड. भले ही आम आदमी को साल में सब्सिडी वाले १२ सिलेंडर ही मिलते हों पर बाजार में इनका जमकर दुरुपयोग हो रहा है। आबूरोड शहर में रसोई गैस का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग देखा जा सकता है। ऐसा इसलिए हो पा रहा है क्योंकि आम आदमी थोड़े लालच में इनको बेच रहा है। अभी कॉमर्शियल १३२१ रुपए का और घरेलू गैस सिलेंडर ७२९ रुपए का है। ऐसे में यह ब्लैक में ९०० से १००० रुपए में आसानी से बिक जाता है। नियमानुसार कार्रवाई के दौरान यदि रसोई गैस सिलेंडर मिलते हैं तो वह एजेंसी को जमा करवाए जाते हैं। उनकी धरोहर राशि सरकार के खाते में जमा होती है। यानी राजस्व भी मिलता है। दूसरी ओर सम्बंधित दुकानदार के खिलाफ कोर्ट में केस चलता है। इसमें जेल और जुर्माना दोनों संभव है। गत दिनों रसद विभाग ने दुकानों व होटलों में छापे मारे थे। उसके बाद कई दुकानदारों ने स्थायी रूप से कार्य बंद कर दिया था और कॉमर्शियल सिलेंडरों का
उपयोग करने लगे लेकिन काफी समय से कार्रवाई नहीं होने के कारण घरेलू गैस सिलेंडरों का दुरुयोग हो रहा है।
होटलों में दुरुपयोग
कई बड़े होटलों पर भी रसोई गैस सिलेंडरों का उपयोग होते देखा जा सकता है। साथ ही, चाय व अन्य खाने पीने के सामान बनाने की थडिय़ों पर भी यही हाल है।
शहर से माउंट मार्ग के बीच में होटलों व चाय थडिय़ों,
आकराभट्टा, मानपुर चौराहा, रेलवे स्टेशन, सांतपुर सहित कई स्थानों पर रसोई गैस का ही उपयोग हो रहा है। (निसं)
लोग ही कर रहे ब्लैक
सरकार ने एक वर्ष के लिए १२ गैस सिलेंडर फिक्स कर दिए हैं। शहर में करीब १० हजार परिवार ऐसे हैं जिनके एक साल में १२ सिलेंडर की खपत नहीं होती है। इनमें कई लोग एजेंसियों से सिलेंडर पूरे ले लेते हैं और बाद में बेच देते हैं। एक सिलेंडर अब ७२९ रुपए में मिलता है। इसकी सब्सिडी १५६ रुपए खाते में आ जाती है। बाद में लोग सिलेंडर ब्लैक कर देते हैं। सब्सिडी के साथ ही सिलेंडर भी महंगा बिक जाता है। इस कारण दुकानदार बड़े सिलेंडर लेना ही पसंद नहीं करते हैं। &विभाग को शिकायतें मिली थीं। कार्रवाई की गई थी। अब भी ऐसा चल रहा है तो अधिकारियों से वार्ता कर कार्रवाई की जाएगी।
महावीर प्रसाद व्यास, जिला रसद अधिकारी, सिरोही
Published on:
07 Jun 2018 10:46 am
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