
मॉडर्न फार्मिंग के साथ एग्रो ट्यूरिज्म ने दी रिटायर्ड फौजी के सपनों को उड़ान
पत्रिका में पढ़कर आया मॉर्डन फार्मिंग व एग्रो ट्यूरिज्म का आइडिया
मुकेश ने राजस्थान पत्रिका में मॉर्डन फार्मिंग व एग्रो ट्यूरिज्म के बारे में पढ़ा। पेइंग गेस्ट योजना के तहत पर्यटन विभाग झुंझुनूं से 2022 में लाइसेंस लिया। उन्होंने खेत में ही पक्के झौंपड़ीनुमा कमरे बनाए। पर्यटक यहां देसी गाय का दूध और बाजरे की रोटी का लुत्फ लेते है। वे हॉर्स राइडिंग व कैमल सफारी से खेत खलिहानों की सैर करते हैं।
विदेशी पर्यटक भी उठा रहे मांजू के खेत- खलिहान का आनन्द
मुकेश ने बताया कि उनके मांजू फार्म पिलानी के ऑनलाइन पेज पर 250 लोगों ने मैम्बरशिप ली हुई है। पर्यटक उनके यहां से शुद्ध गाय का देसी घी, आर्गेनिक गेहूं, फ ल भी डिमांड करते है। उनके यहां जर्मनी, फ्रांस, जापान आदि कई देशों से भी पर्यटक विजिट कर चुके हैं।
फार्म पॉण्ड में फिश फार्मिंग : मुकेश, फार्म पॉण्ड में फिश फार्मिंग भी कर रहे है। राहू नस्ल की मछली की खपत स्थानीय स्तर पर हो जाती है। इससे वे सालाना दो लाख कमा रहे है।
बस्सी एक्सीलेंस सेन्टर से लेकर आए जैतून के 450 पौधे
मुकेश ने बताया कि वे 2018 में जयपुर के बस्सी स्थित एक्सीलेंस सेंटर से जैतून के 450 पौधे लेकर आए। इन्हें 8 बीघा जमीन पर निश्चित दूरी पर लगाया। अब पिछले चार साल से उन्हें अच्छा उत्पादन मिल रहा है। गत वर्ष करीब 10 क्विंटल जैतून का बीज प्राप्त हुआ। इनसे उन्हें 9 से 10 लाख रुपए सालाना मिल रहे है। उन्होंने दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा सहित उत्तर भारत के कई होटलों से टाइअप कर रखा है।
चंदन से महके खेत
मुकेश ने करीब 15 बीघा जमीन पर खजूर के पेड़ लगा रखे है। वहीं 100 चंदन, 400 मौसमी, 200 बेर, किन्नू, अमरूद, अनार आदि के पेड़ लगा रखे है।
पावणों को आई रास
शेखावाटी क्षेत्र में रूरल व एग्रो ट्यूरिज्म चल रहा है। यहां पर्यटक खेती- बाड़ी व ग्रामीण परिवेश का आनन्द लेतेे हैं।
- देवेन्द्र कुमार चौधरी, सहा.नि.पर्यटन विभाग, झुंझुनूं
- भगवान सहाय यादव
Published on:
15 Jan 2024 12:36 pm
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