जयपुर जिले की चौमूं तहसील के गोल्यावाला क्षेत्र की प्रधानो की ढाणी में किसान महेश प्रधान नवाचार करते हुए टमाटर की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
दवा का छिड़काव
महेश ने बताया, वह रासायनिक खाद कम व देसी खाद अधिक काम में लेते हैं। टमाटर में लगने वाले कीटों व रोगों के लिए समय-समय पर उचित मात्रा में कीटनाशक व दवाएं उपयोग में लेते हैं।
छह महीने लगातार उत्पादन
छह फीट ऊंचाई तक पौधों को रस्सी से बांध दिया जाता है। इससे खरपतवार कम होती है, जिसके चलते किसान को कम मेहनत करनी पड़ती है। ऊंचाई पर टमाटर लगने से किसान को तोडऩे में भी आसानी रहती है। साथ ही उत्पादन भी अच्छी मात्रा में हो जाता है। मात्र तीन महीने में तैयार होने वाली इस फसल से छह महीने तक टमाटर तोड़े जाते हैं। चार बीघा खेत पर टमाटर की खेती से प्रति बीघा एक लाख का मुनाफा कमा रहे हैं।
मल्चिंग व ड्रिप सिस्टम से खेती : किसान का कहना है कि जमीन में निरंतर नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग तकनीक का प्रयोग करते हैं। ड्रिप सिस्टम के माध्यम से सिंचाई करते हैं। इससे पानी की बचत हो जाती है।
किसान ले रहे परामर्श
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ऊंचाई पर बंाधने की तकनीक से कम मेहनत में अधिक उत्पादन को समझने के लिए आसपास के कई क्षेत्रों के किसान परामर्श लेने आते रहते हैं।
- किसान महेश प्रधान
- जितेन्द्र कुमार सैन