
युद्ध और संघर्षों का आसान शिकार बन रहे दुनियाभर के स्कूल
नई दिल्ली। हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है। उसे स्कूल और उसके आसपास सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है। लेकिन फिर भी संघर्ष और आपातकालीन स्थितियां लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने से रोक रही हैं। ग्लोबल कोलिशन टू प्रोटेक्ट एजुकेशन फ्रॉम अटैक (जीसीपीइए) के अनुसार पिछले साल शिक्षा पर 3,000 से अधिक हमले हुए। २०२१ की तुलना में इन हमलों में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 'शिक्षा पर हमले' से अभिप्राय शिक्षण संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों पर हमले, जिनमें घायल होना, अपहरण, सशस्त्र समूहों में भर्ती, जबरन श्रम, लक्षित हत्याएं, धमकी और उत्पीड़न आदि शामिल हैं। इन सभी हमलों में से लगभग एक-तिहाई केवल तीन देशों यूक्रेन, म्यांमार और बुर्किना फासो में हुए।
सैन्य उद्देश्यों के लिए स्कूलों का प्रयोग बढ़ा:
रूस के हमले ने यूक्रेन में स्कूलों की स्थिति दयनीय बना दी है। यहां 3,750 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को बमबारी और गोलाबारी का सामना करना पड़ा है, जबकि 1,300 से अधिक स्कूल पूरी तरह से नष्ट हुए हैं। यूक्रेन में लगभग 57 लाख स्कूली बच्चों की शिक्षा बाधित हुई है। सैन्य उद्देश्यों के लिए स्कूलों का उपयोग करने वाले सशस्त्र बलों और गैर-राज्य सशस्त्र समूहों (ऐसे संगठन जो अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए हिंसा का प्रयोग करते हैं) में भी 2022 में वृद्धि हुई। पिछले वर्ष ऐसे लगभग 510 से अधिक मामले दर्ज किए गए। ज्यादातर स्कूलों पर किए जाने वाले हमलों में लक्षित और अंधाधुंध विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे व्यापक स्तर पर क्षति होती है।
अफ्रीकी देशों में हजारों स्कूल हुए बंद:
रिपोर्ट में कहा गया कि 2020 और 2021 में शिक्षा पर हुए सभी हमलों में से आधे से अधिक और एक चौथाई स्कूलों व विश्वविद्यालयों का सैन्य उपयोग, गैर-राज्य सशस्त्र समूहों की ओर से किया गया था। पिछले 50 सालों से स्कूलों पर हमले जारी हैं। दुनियाभर से ये आंकड़े एक परेशान करने वाली तस्वीर पेश करते हैं। मध्य और पश्चिम अफ्रीका में स्कूलों, छात्रों और शिक्षकों को जानबूझकर निशाना बनाने के कारण संघर्ष और असुरक्षा के परिणामस्वरूप 13 हजार से अधिक स्कूल बंद हो गए हैं। वहीं 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से अफगानिस्तान की महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। जिसमें लड़कियों और महिलाओं को शिक्षा से वंचित किया गया है।
स्कूलों को इसलिए बनाया जाता है निशाना:
स्कूल अक्सर ठोस रूप से निर्मित होते हैं। फायरिंग पॉजिशन लेने या निगरानी रखने के लिए इनमें दूसरी या अतिरिक्त मंजिल होती है। स्कूलों में बिजली, पानी, कई सारे कमरे और किचन आदि की व्यवस्था इसे हमलावर समूह के लिए अल्पकालिक रूप से उपयोगी बनाती हैं। हमले के बाद कई बार स्कूल के कमरों को बैरक या हिरासत केंद्रों में बदल दिया जाता है। बारिश से बचने और सभा के लिए समुदाय को एकत्रित करने के लिए भी ये उपयोगी होते हैं। शिक्षा के खिलाफ हमलों की प्राथमिक शिकार अक्सर महिलाएं और लड़कियां होती हैं।
एक्सपर्ट व्यू:
पिछले साल हमलों में हुई चिंताजनक वृद्धि तत्काल रूप से शिक्षा की सुरक्षा की आवश्यकता को रेखांकित करती है। जिसमें स्कूलों या विश्वविद्यालयों के पास आबादी वाले क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों का उपयोग रोका जाना जरूरी है।
दीया निजोने, कार्यकारी निदेशक, जीसीपीइए
वैश्विक स्तर पर गैर-राज्य सशस्त्र समूह
Published on:
18 Sept 2023 11:41 am
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